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इतिहास में एंट्री का टिकट बनी ग्रीनलैंड? ट्रंप क्यों बदलना चाहते हैं दुनिया का नक्शा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड को "हासिल" करने का योजना सिर्फ एक अजीब-सा भू-राजनीतिक बयान नहीं माना जा रहा। अगर ऐसा हुआ, तो अमेरिकी इतिहास में उनका नाम उन राष्ट्रपतियों के साथ जुड़ सकता है, जिन्होंने देश की सीमाओं को बदलकर अमेरिका के क्षेत्रफल का विस्तार किया था।
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अमेरिकी इतिहास में ऐसे दो बड़े उदाहरण अक्सर दिए जाते हैं। जेम्स के पोल्क (1845–1849) के दौर में टेक्सास का विलय हुआ, ओरेगन से जुड़े इलाकों पर अमेरिकी नियंत्रण मजबूत हुआ और मेक्सिको के साथ युद्ध के बाद बड़े भूभाग अमेरिका के हाथ आए।
वहीं विलियम मैककिन्ली (1897–1901) के समय प्यूर्टो रिको, गुआम और फिलीपींस जैसे क्षेत्रों पर अमेरिका का कब्जा हुआ, जिससे अमेरिका का प्रभाव एक औपनिवेशिक शक्ति की तरह फैलने लगा।
इस कड़ी में कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ट्रंप अगर ग्रीनलैंड (करीब 21 लाख वर्ग किलोमीटर) को अमेरिका से जोड़ने में सफल हो जाएं, तो क्षेत्रफल के लिहाज से अमेरिका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन सकता है और कनाडा को पीछे छोड़ देगा।
ग्रीनलैंड को सिर्फ बर्फ का टुकड़ा समझना भी कई विशेषज्ञों के मुताबिक बड़ी भूल होगी। उसके रणनीतिक मायने हैं:
आर्कटिक में मजबूत पकड़ बनाने का मौका
प्राकृतिक संसाधन और समुद्री सीमा से जुड़े कॉन्टिनेंटल शेल्फ के दावे
कुछ लोगों की नजर में "अमेरिकी ध्रुवीय प्रभाव" की दिशा में कदम
अगर मैककिन्ली के समय अमेरिका ने दूर-दराज के द्वीप क्षेत्रों पर नियंत्रण बढ़ाया था, तो ट्रंप के नाम एक पूरा विशाल भूभाग जुड़ सकता है। ऐसा हुआ तो इसे 1867 में अलास्का के सौदे के बाद का सबसे बड़ा क्षेत्रीय "डील" भी कहा जा सकता है, और अमेरिकी विस्तारवादी परंपरा की आधुनिक कड़ी के तौर पर देखा जाएगा।
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