सिमोनियन ने कहा, "ट्रंप रीगन तो दूर, केनेडी भी नहीं हैं। लेकिन जिस तरह वह जो कुछ भी छूते हैं, उसे घिस-पीसकर बदल देने और उसकी जगह कुछ नया खड़ा करने की जिद रखते हैं, उस मायने में ट्रंप लिंकन जैसे हैं। वह सफल होंगे या नहीं, यह मैं नहीं जानती।"
उन्होंने आगे ट्रंप की नीतियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अमेरिकियों के लिए यह अच्छा है क्या? हां, अमेरिकियों के लिए तो बिल्कुल अच्छा है। लेकिन बाकी दुनिया के लिए? उतना नहीं। क्योंकि जो एक के लिए फायदा है, वह अक्सर दूसरे के लिए नुकसान बन जाता है। जब भेड़िया पेट भर लेता है, तो मेमना मारा जाता है। और जब मेमना बचा रहता है, तो भेड़िया भूखा रह जाता है।"
सिमोनियन के मुताबिक, ट्रंप के कदमों ने वैश्विक स्तर पर "युग का टैग" ही बदल दिया है और ऐसा बदलाव आखिरी बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देखा गया था।
उन्होंने कहा, "तब क्या लिखा होता था? 'मानवाधिकार', 'अभिव्यक्ति की आज़ादी', 'अल्पसंख्यकों का सम्मान'। सोचिए, वेनेज़ुएला में लोग आज उन सभी नारों पर आंसुओं के बीच कैसे हंस रहे होंगे।"
सिमोनियन ने रूसी कथाकार इवान क्रिलोव की एक दंतकथा की पंक्ति के सहारे इस "नए दौर" का नाम भी बताया।
उन्होंने कहा, "इस साल से हमारे दौर का नाम यह है 'तुम दोषी हो, बस इसलिए कि मैं भूखा हूं।' कह सकते हैं कि तथाकथित 'स्वतंत्र विश्व' के नेता डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौर को यही नाम दे दिया है।"
सिमोनियन ने यह भी साफ किया कि वह इस सोच से सहमत नहीं हैं। फिर भी, उनके मुताबिक ट्रंप उन अमेरिकियों की "खत्म होती नस्ल" में आते हैं, जिन्होंने देश को "खड़ा" किया।