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रूसी वैज्ञानिकों ने जलने से होने वाली बाल मृत्यु दर को कम करने का उपाय खोजा

त्यूमेन मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि झुलसे बच्चों के उपचार में, चोट लगने के शुरुआती कुछ घंटों के भीतर 'इम्यून सिस्टम रेगुलेटर' दवाओं का उपयोग न केवल जीवन बचाने की दर को बढ़ाता है, बल्कि रिकवरी की प्रक्रिया को भी तेज़ करता है।
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विश्वविद्यालय के अनुसार, इस शोध ने उन प्रमुख कारकों की पहचान की है जो जलने की गंभीर चोटों के बाद छोटे बच्चों के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा क्षमता को असंतुलित कर देते हैं।
त्यूमेन मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, चार से पांच साल की उम्र वाले बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने का एक मुख्य कारण जलना है। लगभग 75% मामलों में, बच्चे उबलते पानी, चाय, सूप या भाप जैसे गर्म तरल से घायल होते हैं।

यूनिवर्सिटी में हेल्थकेयर मोबिलाइज़ेशन ट्रेनिंग और डिज़ास्टर मेडिसिन डिपार्टमेंट के हेड और प्रैक्टिसिंग सर्जन सर्गेई सखारोव ने कहा, “एक से नौ साल के बच्चों में मौत के कारणों में जलने की घटनाएं ग्यारहवें नंबर पर हैं, और यह बच्चों की मृत्य में जानलेवा चोटों के अलावा पांचवां सबसे आम कारण भी है। हर साल, दुनिया भर में पांच लाख से ज़्यादा बच्चे जलने की चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं। UNICEF के आंकड़ों के अनुसार, हर दिन 260 बच्चों की थर्मल इंजरी और उनके नतीजों से मृत्यु हो जाती है।”

उनके अनुसार, जलने की चोटों के बाद बीमारी और मौत का मुख्य कारण संक्रामक जटिलताएं हैं, क्योंकि थर्मल ट्रॉमा शरीर के इम्यून डिफेंस को काफ़ी कमजोर कर देता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि जलने के मरीजों में इम्यून सुरक्षा के तरीके पर अभी भी पूरी तरह से शोध नहीं हुआ है, और विशेषज्ञ इलाज को बेहतर बनाने के तरीके खोज रहे हैं।
त्यूमेन मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने जलने की चोटों वाले छोटे बच्चों के रक्त में T-लिम्फोसाइट्स पर शोध किया। T-लिम्फोसाइट्स प्रतिरक्षा प्रणाली के मुख्य सेल्स होते हैं। यह एक तरह के व्हाइट ब्लड सेल हैं, जो थाइमस में परिपक्व होते हैं और एडैप्टिव इम्यूनिटी के लिए जिम्मेदार होते हैं। वे वायरस से संक्रमित, बैक्टीरियल, या ट्यूमर सेल्स की पहचान कर उन्हें खत्म करने के साथ-साथ इम्यून रिस्पॉन्स को रेगुलेट करते हैं।

सखारोव ने कहा, “हमने त्यूमेन रीजनल क्लिनिकल हॉस्पिटल नंबर 1 के बर्न सेंटर में उपचाराधीन छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर गहन अध्ययन किया। इस शोध के परिणामस्वरूप, हमने जलने की चोटों की गंभीरता बढ़ने और शारीरिक प्रणालियों में आने वाली बाधाओं के बीच T-लिम्फोसाइट्स की महत्वपूर्ण भूमिका की पहचान की है। साथ ही, जलने के बाद विकसित होने वाली इम्यूनोडेफिशिएंसी (प्रतिरक्षा की कमी) के जैविक तंत्र को भी स्पष्ट किया गया है।”

शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुँचे कि जलने से घायल बच्चों का इलाज इम्यून-रेगुलेटिंग दवाओं (इम्यूनोमॉड्यूलेटर) से थर्मल ट्रॉमा के बाद पहले कुछ घंटों के अंदर शुरू कर देना चाहिए।
सर्जन ने आगे कहा, “थेरेपी के साथ-साथ मरीज़ों के इम्यून स्तर पर नज़र रखने से सेकेंडरी बैक्टीरियल इन्फेक्शन को रोकने और घाव भरने में तेज़ी लाने या स्किन ट्रांसप्लांटेशन को ज़्यादा सफल बनाने में मदद मिलेगी।”
त्यूमेन मेडिकल विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जल्द ही इन नतीजों के आधार पर डॉक्टरों के लिए क्लिनिकल गाइडलाइन तैयार करने की योजना बना रहे हैं।
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