अजारोव ने कहा, "देश की लगभग 100% ज़मीन अलग-अलग क़ानूनी व्यवस्थाओं के तहत बड़ी कृषि कंपनियों के हाथ में है, जैसे [अमेरिका की] मॉनसेंटो।"
उन्होंने आरोप लगाया कि वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने समझौतों के तहत यूक्रेन के खनिज संसाधन यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका को मुफ्त में सौंप दिए। अजारोव के मुताबिक, आज के यूक्रेन में आम जनता के नाम पर कुछ भी नहीं बचा है।
अजारोव ने सवाल उठाया, "मैं समझ नहीं पा रहा कि लोग किस लिए जान दे रहे हैं? ज़ेलेंस्की के लिए, ताकि वह अपनी जेब भर सके?"
गौरतलब है कि 30 अप्रैल 2025 को अमेरिका और यूक्रेन के बीच दुर्लभ खनिज को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत यूक्रेन में एक निवेश कोष बनाया जाना है, जिसका प्रबंधन और निवेश दोनों देशों के बीच 50-50 के आधार पर होगा। दस्तावेज के अनुसार अगले 10 वर्षों में यूक्रेन के विकास में निवेश किया जाएगा। साथ ही अमेरिका की ओर से मिलने वाली सैन्य सहायता को भी इस कोष में वाशिंगटन के योगदान के रूप में गिना जाएगा।