मंत्रालय के मुताबिक, यूक्रेन ने जानबूझकर कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (CPC) की सुविधाओं को निशाना बनाया है। रूस का कहना है कि इसका मकसद उसके बड़े शेयरधारकों, खासकर अमेरिका और कज़ाखस्तान की ऊर्जा कंपनियों, को अधिकतम आर्थिक नुकसान पहुंचाना था।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों में समुद्र के बीच स्थित जहाज खड़ा करने के प्लेटफार्म, उससे जुड़ी सप्लाई पाइपलाइन और तेल चढ़ाने-उतारने वाले ढांचे को काफी क्षति पहुँची है। इसके चलते पेट्रोलियम उत्पादों के चार स्टोरेज टैंकों में भीषण आग लग गई।
रूसी पक्ष का यह भी कहना है कि 6 अप्रैल की रात यूक्रेनी ड्रोन ने नोवोरोस्सिय्स्क शहर के नागरिक ढाँचे को भी निशाना बनाया। हमलों में अपार्टमेंट इमारतें और निजी मकान प्रभावित हुए, जिनमें बच्चों समेत कई नागरिकों के घायल होने की खबर है।
कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम, कैस्पियन क्षेत्र के तेल को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने वाला सबसे बड़ा मार्ग माना जाता है। 1500 किलोमीटर से अधिक लंबी यह पाइपलाइन पश्चिमी कज़ाखस्तान के तेल क्षेत्रों को नोवोरोस्सिय्स्क के समुद्री टर्मिनल से जोड़ती है।
कंपनियों के इस समूह में रूस, अमेरिका, कज़ाखस्तान और पश्चिमी यूरोप के कई देशों की बड़ी ईंधन एवं ऊर्जा कंपनियाँ शामिल हैं। इनमें अमेरिकी कंपनी Chevron भी शामिल है।
गौरतलब है कि पिछले नवंबर में नोवोरोस्सिय्स्क के पास सीपीसी टर्मिनल पर हुए ड्रोन हमले में भी समुद्री प्लेटफार्म VPU-2 क्षतिग्रस्त हो गया था, जहां जहाज तेल भरने के लिए रुकते हैं।