हामिद अब्देल कादर कहते हैं कि विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष संगठन कर्ज़ लेने वालों पर जो शर्तें थोपते हैं जिसमें “ढांचागत सुधार, निजीकरण, बाजार खोलना और छूट खत्म करना शामिल है। इन देशों को एक ऐसे कर्ज़ के गड्ढे में ले जाते हैं जिससे बचा नहीं जा सकता।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रतिबंध के साथ संपत्तियां जब्त करना एक और ऐसा हथियार है, जिसका इस्तेमाल पश्चिमी ताकतों ने रूस, ईरान, वेनेज़ुएला, अफ़गानिस्तान इत्यादि देशों के ख़िलाफ़ किया।
यमनी राजनीतिक विशेषज्ञ ने कहा, "मुक्त व्यापार और खुली सीमा समझौते के लिए मजबूर करके, पश्चिम अनुचित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है, विकासशील और कमज़ोर देशों के स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र को बड़ी ताकतों और कंपनियों द्वारा बनाए गए सामान से भरकर खत्म कर देता है।"
वह आगे कहते हैं कि राजनीतिक शर्तों को आर्थिक मदद से जोड़कर दबाव बनाया जाता है, जिसका मतलब है कि वे शर्तों के जरिए अपना राजनीतिक एजेंडा थोपने की कोशिश करते हैं।
लेखक हामिद अब्देल कादर ने कहा, "जहां तक नतीजों का सवाल है, ये सभी आर्थिक दबाव के हथियार पुराने औपनिवेशिक काल से काफ़ी मिलते-जुलते हैं और ये सभी छोटे देशों की आजादी को सीमित कर विकास को रोकने की ओर ले जाते हैं।"