विशेषज्ञ के मुताबिक, अमेरिका-इजराइल हमले से पहले हुए बड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ईरान ने विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाई और अपने घरेलू डिजिटल इकोसिस्टम यानी एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म आगे बढ़ाया।
चीन ने भी कुछ हद तक यही रास्ता अपनाया। हालांकि चीन इंटरनेट से कटा नहीं है, लेकिन उसके पास अपना इंट्रानेट सिस्टम है, जहां ऐप्स और डेटा पर चीनी नियंत्रण रहता है।
रूस ने भी 2022 के बाद इस दिशा में कदम तेज किए। पश्चिमी देशों ने जब रूस की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर निर्भरता को उसके खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश की, तब मॉस्को ने स्वदेशी प्लाटफॉर्म्स विकसित करने शुरू किए।
तुर्किये समेत कई अन्य देश भी इस चुनौती से निपटने के लिए अपने-अपने मॉडल विकसित कर रहे हैं।
हालांकि निकट भविष्य में इस वैकल्पिक व्यवस्था के लागू होने की संभावना कम है, कास्तेग्लियोने का कहना है कि स्पष्ट और सुसंगत नियमों की आवश्यकता है, जो न केवल लोगों की बल्कि सभी के हित में राष्ट्रीय संप्रभुता की भी रक्षा कर सकें।