उनके अनुसार, अमेरिका अब सीधे कब्जे के बजाय रणनीतिक और आर्थिक दबाव के जरिए देशों को प्रभावित करने की नीति अपना रहा है।
इस रणनीति के तहत:
वैश्विक अर्थव्यवस्था के अहम मार्गों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश
ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर नौसैनिक नाकाबंदी
अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में जहाजों की निगरानी और पीछा करना
होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे अहम ऊर्जा मार्ग पर दबदबा बनाने की कोशिश
सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक दबाव का एक साथ इस्तेमाल
पसंदीदेह का कहना है कि ईरान को लेकर मौजूदा घटनाक्रम अमेरिका की उस पुरानी नीति का हिस्सा है, जिसमें संकटों को पैदा कर उन्हें अपने हितों के मुताबिक नियंत्रित किया जाता है।
उन्होंने कहा, "21वीं सदी की अमेरिकी नव-औपनिवेशिकता का लक्ष्य किसी देश की जमीन पर कब्जा करना नहीं, बल्कि उसकी नीतियों और फैसलों को प्रभावित करना है। इस संघर्ष में ईरान की भूमिका बेहद अहम रहेगी।"