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परमाणु हथियार रखने वाले देशों की संख्या तेजी से बढ़ने का खतरा: रूस

रूस चिंतित है कि अपने क्षेत्र में परमाणु हथियार तैनात करने के लिए तैयार पश्चिमी देशों की संख्या में वृद्धि तेजी से बढ़कर अनियंत्रित हो जा सकती है। यह बात रूस के विदेश मंत्रालय के विशेष राजदूत और NPT समीक्षा सम्मेलन में रूसी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख आंद्रेई बेलोउसोव ने Sputnik को दिए एक साक्षात्कार में कही।
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परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का 11वां समीक्षा सम्मेलन 27 अप्रैल से 22 मई तक न्यूयॉर्क में आयोजित किया जाएगा।
बेलोउसोव ने बताया कि NPT के संदर्भ में रूस कई मुद्दों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। राजनयिक के मुताबिक, "सामूहिक पश्चिम" के देशों में एक ऐसी प्रवृत्ति दिखाई देती है, जो "जल्द ही हिमस्खलन जैसी असामान्य गति से बढ़ सकती है।"
उन्होंने कहा, "इन देशों में ही उन पश्चिमी गैर-परमाणु राज्यों की संख्या बढ़ाने की मांग बढ़ रही है, जिनकी जमीन पर दूसरे देशों के परमाणु हथियार तैनात किए जाएँ। कुल मिलाकर, नाटो के "संयुक्त परमाणु मिशन" तथा "विस्तारित" या अब "फॉरवर्ड" परमाणु प्रतिरोध जैसी गहराई से अस्थिर करने वाली और NPT को नुकसान पहुँचाने वाली योजनाएँ कई मायनों में विकसित हो रही हैं।"
बेलोउसोव ने उल्लेख किया कि इन मुद्दों में जो मॉस्को के लिए चिंता का कारण है किसी प्रकार की "यूरोपीय संघ की परमाणु क्षमता" का निर्माण भी शामिल है।
राजनयिक साक्षात्कार के अंत में कहा, "इस संगठन के कुछ गैर-परमाणु सदस्य देशों में यह प्रवृत्ति भी दिखाई दे रही है कि वे अपने स्वयं के परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। निस्संदेह इस प्रक्रिया का परिणाम NPT के लिए घातक हो सकता है।"
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पश्चिम के परमाणु हथियारों पर नए रुख से रूस चिंतित: विदेश मंत्रालय
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