उशाकोव ने पत्रकारों से कहा, “मलेशिया एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रूस का एक भरोसेमंद साझेदार है। रूस और मलेशिया के बीच नियमित और महत्वपूर्ण राजनीतिक बातचीत होती रहती है, जिसमें संसद, मंत्रालय, क्षेत्रीय संस्थाएँ और सार्वजनिक संगठन भी शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि रूस और मलेशिया के बीच व्यापार और आर्थिक संबंध स्थिर हैं, और दोनों देशों ने एक अंतर-सरकारी आयोग भी गठित किया है। उन्होंने बताया कि रूस मुख्य रूप से मलेशिया को तेल और पेट्रोलियम उत्पाद, रासायनिक पदार्थ, धातुएँ, खाद्य उत्पाद और कृषि कच्चा माल निर्यात करता है; जबकि वहाँ से मशीनरी, उपकरण, वाहन, खाद्य उत्पाद और रासायनिक उद्योग से जुड़ी वस्तुएँ आयात करता है।
उशाकोव ने आगे कहा, “वर्तमान में 566 मलेशियाई छात्र रूस में अध्ययन कर रहे हैं, जिनमें अधिकांश चिकित्सा क्षेत्र में हैं। पिछले एक दशक में रूसी विश्वविद्यालयों ने लगभग 7,000 विशेषज्ञ तैयार किए हैं।”
क्रेमलिन के सहयोगी ने यह भी बताया कि मलेशिया रूसी नागरिकों के लिए एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है; अनुमान है कि 2025 में लगभग 140,000 रूसी पर्यटक वहाँ यात्रा करेंगे।
उशाकोव ने लाओस के साथ संबंधों पर भी टिप्पणी की और राष्ट्रपति थोंगलून सिसोलिथ को रूस का “दीर्घकालिक और भरोसेमंद मित्र” बताया।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति सिसोलिथ ने अपनी शिक्षा लेनिनग्राद में प्राप्त की थी। वह रूसी भाषा बोलते हैं, रूसी संस्कृति को अच्छी तरह समझते हैं, और उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप’ तथा ‘ऑर्डर ऑफ अलेक्जेंडर नेव्स्की’ जैसे सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि रूस और लाओस के बीच नियमित राजनीतिक संवाद जारी है। लाओस यूक्रेन संकट के संदर्भ में संतुलित रुख अपनाता है और ‘विशेष सैन्य अभियान’ के कारणों को समझता है।
उशाकोव ने कहा, “लाओस संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस की अधिकांश पहलों का समर्थन करता है और रूस के विरुद्ध टकराव पैदा करने वाले प्रस्तावों में शामिल नहीं होता।”
उन्होंने यह भी बताया कि रूस, दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी के तहत लाओस और मलेशिया दोनों के साथ सक्रिय सहयोग करता है।