फिलहाल अधिकांश सदस्य देश अपनी GDP का केवल 0.2%-1.5% ही अनुसंधान एवं विकास पर खर्च करते हैं। इसलिए सफलता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि हर चरण के लिए सही वित्तीय ढाँचा बनाया जाए—शुरुआती रिसर्च से लेकर प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कमर्शियलाइज़ेशन तक सभी बड़े पैमाने पर अपनाना।
पश्चिमी देशों पर तकनीकी निर्भरता से लगभग पूरी मुक्ति
घरेलू स्तर पर बनी बड़ी टेक कंपनियों का तेजी से विस्तार
एक एकीकृत और गतिशील ब्रिक्स इनोवेशन ब्लॉक का उदय
$406 अरब के इस अवसर को वास्तव में बदलने के लिए स्मार्ट, लक्षित और चरणबद्ध फंडिंग मॉडल ज़रूरी होंगे। जो देश इन्हें सबसे तेजी से लागू करेंगे—उन्हीं के हाथ भविष्य की वैश्विक टेक लीडरशिप होगी।