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हिज़्बुल्लाह, ईरानी हमलों से इज़राइल पर दबाव, हौथिस शामिल हो सकते हैं: विशेषज्ञ
हिज़्बुल्लाह, ईरानी हमलों से इज़राइल पर दबाव, हौथिस शामिल हो सकते हैं: विशेषज्ञ
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रोम यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डॉ. लोरेंजो ट्रॉम्बेटा ने Sputnik को बताया कि इज़राइली रडार और सैटेलाइट बेस पर हिज़्बुल्लाह के हमले ईरानी रणनीति को दिखाते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है इसके पीछे कोई संचालन योजना है।
2026-03-12T12:02+0530
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इज़रायली संचार प्रणाली पर बहुत ज़्यादा दबावविशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि एक साथ कई मोर्चों से होने वाले मिसाइल हमले, साइबर हैकिंग और समन्वित कार्रवाइयां इज़राइल के संचार ढांचे पर भारी दबाव डाल रही हैं।इज़राइल अभी कितनी मुश्किल में है?डॉ. लोरेंजो ट्रॉम्बेटा ने आगे बताया कि यमनी अंसार अल्लाह किसी भी समय हिज़्बुल्लाह के हमलों और ईरान द्वारा किए जाने वाले लंबी दूरी के मिसाइल हमलों में शामिल हो सकता है।नाज़ुक संतुलनरोम यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर ने आगे कहा कि यमनी मोर्चा अभी खुला नहीं है, लेकिन समय के साथ एक नया संतुलन बनाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
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रोम यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डॉ. लोरेंजो ट्रॉम्बेटा,हिज़्बुल्लाह हमले,इज़राइल संचार प्रणाली,ईरान रणनीति,इज़राइल सुरक्षा स्थिति,मध्य पूर्व संघर्ष,hezbollah israel conflict,iran israel tension
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हिज़्बुल्लाह, ईरानी हमलों से इज़राइल पर दबाव, हौथिस शामिल हो सकते हैं: विशेषज्ञ
रोम यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ डॉ. लोरेंजो ट्रॉम्बेटा ने स्पष्ट किया है कि हिज़्बुल्लाह द्वारा इज़रायली रडार और सैटेलाइट बेस पर हमले ईरानी रणनीति को दोहराते हैं, लेकिन यह किसी पूर्व-निर्धारित संचालन योजना को नहीं दर्शाते।
ट्रॉम्बेटा Sputnik को बताते हैं, "हम ऐसे समूहों को देख रहे हैं जिनके रणनीतिक हित एक व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण से जुड़े हैं, लेकिन इनमें से प्रत्येक देश काफी हद तक अपनी स्वायत्तता के साथ काम करता है।"
इज़रायली संचार प्रणाली पर बहुत ज़्यादा दबाव
विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि एक साथ कई मोर्चों से होने वाले मिसाइल हमले, साइबर हैकिंग और समन्वित कार्रवाइयां
इज़राइल के संचार ढांचे पर भारी दबाव डाल रही हैं।
ट्रॉम्बेटा कहते हैं, "इज़राइल ने निश्चित रूप से कई वैकल्पिक संचार प्रणालियाँ और साझा बुनियादी ढाँचे तैयार कर रखे हैं, लेकिन सवाल यह है कि अत्यधिक तनाव और हमलों के बीच वे कितनी कुशलता से काम कर पाएंगे?"
इज़राइल अभी कितनी मुश्किल में है?
विशेषज्ञ ने आगे बताया कि हिज़्बुल्लाह के हमलों से "सक्रिय मोर्चों की संख्या बढ़ जाती है" और इज़रायली सैन्य और ख़ुफ़िया संसाधन एक ही समय में कई युद्ध क्षेत्रों में तैनात हो जाते हैं। उनके अनुसार, इज़रायली सैन्य सिद्धांत छोटे, निर्णायक अभियान में तनाव की स्थिति में बढ़त बनाए रखने पर केंद्रित है लेकिन अब एक ही समय में अलग-अलग दिशाओं से खतरे सामने आ रहे हैं।
डॉ. लोरेंजो ट्रॉम्बेटा ने आगे बताया कि यमनी अंसार अल्लाह किसी भी समय
हिज़्बुल्लाह के हमलों और ईरान द्वारा किए जाने वाले लंबी दूरी के मिसाइल हमलों में शामिल हो सकता है।
ट्रॉम्बेटा कहते हैं, "चुनौती तुरंत सेना की हार की नहीं, बल्कि कई मोर्चों से लगातार दबाव में रणनीतिक तालमेल बनाए रखने की है।"
रोम यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर ने आगे कहा कि यमनी मोर्चा अभी खुला नहीं है, लेकिन समय के साथ एक नया संतुलन बनाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
ट्रॉम्बेटा कहते हैं, "हमें इन बदलती स्थितियों का लगातार आकलन करना होगा ताकि यह समझा जा सके कि इज़राइल बाहर से आने वाले खतरों के अनुरूप कैसे अपनी रणनीति बदलता है।"