https://hindi.sputniknews.in/20260316/horimuj-se-aavaajaahii-ke-lie-iiriaan-ke-saath-bhaarit-kaa-koii-smjhautaa-nhiin-hai-jyshnkri-10618644.html
होर्मुज से आवाजाही के लिए ईरान के साथ भारत का कोई 'समझौता' नहीं है: जयशंकर
होर्मुज से आवाजाही के लिए ईरान के साथ भारत का कोई 'समझौता' नहीं है: जयशंकर
Sputnik भारत
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत का ईरान के साथ भारतीय ध्वज वाले जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए कोई "व्यापक समझौता" नहीं है, और "जहाजों की हर आवाजाही एक अलग घटना होती है।"
2026-03-16T11:12+0530
2026-03-16T11:12+0530
2026-03-16T11:12+0530
राजनीति
भारत
भारत सरकार
भारत का विदेश मंत्रालय (mea)
विदेश मंत्रालय
एस. जयशंकर
ईरान
युद्धपोत
अमेरिका
इज़राइल
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07ea/01/0d/10338039_0:0:1280:720_1920x0_80_0_0_634653eef5d5ebb98a47f3e05f655907.jpg
रविवार को ब्रसेल्स में मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा कि इस अहम जलमार्ग से भारतीय जहाज़ों के सुरक्षित गुज़रने को लेकर ईरान के साथ बातचीत "जारी है" और "इसके नतीजे भी मिल रहे हैं"।उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ईरान को बदले में कुछ भी मिला है। भारत और ईरान के बीच संबंध हैं। और इस टकराव को हम अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।गौरतलब है कि जयशंकर की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे अन्य देशों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खुलवाने में अमेरिका की मदद के लिए अपने युद्धपोत भेजने चाहिए।बता दें कि ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले के बाद से ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को प्रभावी रूप से बंद कर दिए जाने के बाद ऊर्जा की कीमतें तेज़ी से बढ़ गई हैं।
https://hindi.sputniknews.in/20260315/hrimuj-jldmriuumdhy-pri-trinp-kaa-byaan-tel-lene-vaale-desh-khud-snbhaalen-surikshaa-ameriikaa-kriegaa-mdd-10616719.html
भारत
ईरान
अमेरिका
इज़राइल
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
2026
सत्येन्द्र प्रताप सिंह
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e6/0c/13/137983_0:0:390:391_100x100_80_0_0_d7f05508f508b7ccc8f3f1e549c0f145.jpg
सत्येन्द्र प्रताप सिंह
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e6/0c/13/137983_0:0:390:391_100x100_80_0_0_d7f05508f508b7ccc8f3f1e549c0f145.jpg
खबरें
hi_IN
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07ea/01/0d/10338039_161:0:1121:720_1920x0_80_0_0_92b79cf9da0619dc17a416440cdabfb9.jpgSputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
सत्येन्द्र प्रताप सिंह
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e6/0c/13/137983_0:0:390:391_100x100_80_0_0_d7f05508f508b7ccc8f3f1e549c0f145.jpg
ईरान युद्ध, होर्मुज से आवाजाही, ईरान के साथ भारत का समझौता, भारतीय विदेश मंत्री का बयान, जयशंकर का बयान, भारतीय ध्वज वाले जहाज, होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाजों की आवाजाही, भारतीय जहाज़ों के सुरक्षित गुज़रने को लेकर बातचीत, भारत और ईरान के बीच संबंध
ईरान युद्ध, होर्मुज से आवाजाही, ईरान के साथ भारत का समझौता, भारतीय विदेश मंत्री का बयान, जयशंकर का बयान, भारतीय ध्वज वाले जहाज, होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाजों की आवाजाही, भारतीय जहाज़ों के सुरक्षित गुज़रने को लेकर बातचीत, भारत और ईरान के बीच संबंध
होर्मुज से आवाजाही के लिए ईरान के साथ भारत का कोई 'समझौता' नहीं है: जयशंकर
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत का ईरान के साथ भारतीय ध्वज वाले जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए कोई "व्यापक समझौता" नहीं है और "जहाजों की हर आवाजाही एक अलग घटना होती है।"
रविवार को ब्रसेल्स में मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा कि इस अहम जलमार्ग से भारतीय जहाज़ों के सुरक्षित गुज़रने को लेकर ईरान के साथ बातचीत "जारी है" और "इसके नतीजे भी मिल रहे हैं"।
जयशंकर ने रेखांकित किया कि "अभी मैं उनसे बातचीत करने में लगा हुआ हूँ, और मेरी बातचीत के कुछ नतीजे भी निकले हैं। यह प्रक्रिया अभी जारी है। अगर इससे मुझे नतीजे मिल रहे हैं, तो ज़ाहिर है कि मैं इस पर आगे भी ध्यान देता रहूँगा।"
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ईरान को बदले में कुछ भी मिला है। भारत और ईरान के बीच संबंध हैं। और इस टकराव को हम अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।
गौरतलब है कि जयशंकर की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे अन्य देशों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खुलवाने में अमेरिका की मदद के लिए अपने युद्धपोत भेजने चाहिए।
बता दें कि ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले के बाद से ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को प्रभावी रूप से बंद कर दिए जाने के बाद
ऊर्जा की कीमतें तेज़ी से बढ़ गई हैं।