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विदेशी भाड़े के सैनिकों की गिरफ्तारी, भारत को निशाना बनाने का संकेत: पूर्व NIA अधिकारी
विदेशी भाड़े के सैनिकों की गिरफ्तारी, भारत को निशाना बनाने का संकेत: पूर्व NIA अधिकारी
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नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के एक पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ने Sputnik से कहा कि हाल ही में विदेशी भाड़े के सैनिकों के एक गिरोह की गिरफ्तारी, जिसमें एक... 20.03.2026, Sputnik भारत
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पूर्व अधिकारी के मुताबिक, केस को NIA के हवाले इसलिए किया गया क्योंकि इसमें “घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तर पर आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर परतें” मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि भारत विरोधी ताकतें ऐतिहासिक रूप से देश के बाहरी, कठिन-नियंत्रण वाले क्षेत्रों को अस्थिरता पैदा करने के लिए टारगेट करती रही हैं।नॉर्थ-ईस्ट और म्यांमार कॉरिडोर में विदेशी दिलचस्पीपूर्व अधिकारी ने कहा कि भारत के उत्तर-पूर्वी इलाके में विदेशी शक्तियों की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। उनके अनुसार, “अगर कोई देश किसी प्रतिद्वंद्वी को कमजोर करना चाहता है, तो वह उसके बाहरी इलाकों में अशांति पैदा करता है — और आज की स्थितियों में म्यांमार ऐसे ऑपरेशनों के लिए सबसे आसान लॉन्चपैड बन चुका है।”पूर्व NIA अधिकारी का कहना है कि उपलब्ध पैटर्न यह दर्शाता है कि भारत विरोधी जातीय समूहों को म्यांमार बॉर्डर से सटे इलाकों में प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह नेटवर्क ड्रोन-हैंडलिंग, कम्युनिकेशन जैमिंग, हथियारों की ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसे तत्वों पर आधारित है — जिसका उद्देश्य भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना को कमजोर करना है।ड्रोन वॉरफेयर: भारत की नई सुरक्षा चुनौतीउन्होंने चेतावनी दी कि ड्रोन आधारित युद्ध-तकनीक (Drone Warfare) अब भारत के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।उद्देश्य स्पष्ट: भारत को रणनीतिक रूप से कमजोर रखना
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भारत, म्यांमार , मिजोरम, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (nia)
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विदेशी भाड़े के सैनिकों की गिरफ्तारी, भारत को निशाना बनाने का संकेत: पूर्व NIA अधिकारी
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के एक पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ने Sputnik से कहा कि हाल ही में विदेशी भाड़े के सैनिकों के एक गिरोह की गिरफ्तारी, जिसमें एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल है, किसी छोटे आपराधिक मामले से कहीं अधिक है। उनके अनुसार, यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ चल रहे एक बड़े, संगठित और बहु-स्तरीय ऑपरेशन का संकेत है।
पूर्व अधिकारी के मुताबिक, केस को
NIA के हवाले इसलिए किया गया क्योंकि इसमें “घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तर पर आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर परतें” मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि
भारत विरोधी ताकतें ऐतिहासिक रूप से देश के बाहरी, कठिन-नियंत्रण वाले क्षेत्रों को अस्थिरता पैदा करने के लिए टारगेट करती रही हैं।
नॉर्थ-ईस्ट और म्यांमार कॉरिडोर में विदेशी दिलचस्पी
पूर्व अधिकारी ने कहा कि भारत के उत्तर-पूर्वी इलाके में विदेशी शक्तियों की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। उनके अनुसार, “अगर कोई देश किसी प्रतिद्वंद्वी को कमजोर करना चाहता है, तो वह उसके बाहरी इलाकों में अशांति पैदा करता है — और आज की स्थितियों में म्यांमार ऐसे ऑपरेशनों के लिए सबसे आसान लॉन्चपैड बन चुका है।”
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के नागरिकों को मिजोरम–मणिपुर बॉर्डर के आसपास “कई वर्षों से” देखा गया है, जो इस क्षेत्र में सक्रिय विदेशी इंटेलिजेंस और कोवर्ट नेटवर्क की ओर संकेत करता है।
पूर्व NIA अधिकारी का कहना है कि उपलब्ध पैटर्न यह दर्शाता है कि भारत विरोधी जातीय समूहों को म्यांमार बॉर्डर से सटे इलाकों में प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह ने
टवर्क ड्रोन-हैंडलिंग, कम्युनिकेशन जैमिंग, हथियारों की ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसे तत्वों पर आधारित है — जिसका उद्देश्य भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना को कमजोर करना है।
ड्रोन वॉरफेयर: भारत की नई सुरक्षा चुनौती
उन्होंने चेतावनी दी कि ड्रोन आधारित युद्ध-तकनीक (Drone Warfare) अब भारत के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
“एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित हो रही है, लेकिन अभी पूर्ण रूप से सक्षम नहीं है,” उन्होंने कहा। “अगर प्रशिक्षित विदेशी समर्थित ग्रुप पहाड़ी, जंगल और दुर्गम इलाकों में ड्रोन तैनात करने लगें, तो भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।”
उद्देश्य स्पष्ट: भारत को रणनीतिक रूप से कमजोर रखना
पूर्व अधिकारी के अनुसार, इन विदेशी ऑपरेटरों और भाड़े के सैनिकों की मंशा बिल्कुल साफ है। “वे चाहते हैं कि भारत दीर्घकालिक रूप से एक कमजोर रणनीतिक स्थिति में रहे, ताकि बाहरी ताकतों को क्षेत्रीय बढ़त मिल सके।”