लवरोव ने कहा, “बहुध्रुवीयता एक विकल्प नहीं अपितु एक वस्तुनिष्ठ वास्तविकता है, दुनिया में नव-औपनिवेशिक प्रथाओं पर निर्मित प्राचीन नवउदारवादी मॉडल लुप्त हो रहा है और ब्रिक्स को नई व्यवस्था को आकार देना चाहिए। वैश्विक दक्षिण और पूर्व अब वैश्विक आर्थिक विकास का इंजन हैं, जिसमें अफ्रीकी संघ, आसियान, सीईएलएसी, एससीओ और ईएईयू जैसे क्षेत्रीय ब्लॉक समानता, बहुपक्षवाद और गैर-भेदभाव पर आधारित एक निष्पक्ष आर्थिक प्रणाली को आकार दे रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 2030 तक वैश्विक जीडीपी में 20 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ा सकती है इसके लिए पहुंच खुली और समावेशी होनी चाहिए। क्लोसड, केवल आमंत्रण-आधारित पश्चिमी पहल गंभीर जोखिम उत्पन्न करती हैं इसके अतिरिक्त डिजिटल चुनौतियों के लिए सीमा पार सहयोग की आवश्यकता होती है और कोई भी देश अकेले उनका सामना नहीं कर सकता।"