मुजाहिद के मुताबिक, "पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर हुए हालिया हमले अमेरिका द्वारा बगराम एयरबेस का मुद्दा फिर से उठाने से जुड़े हो सकते हैं।"
एरियाना न्यूज़ पोर्टल ने प्रेस सचिव के हवाले से कहा, "पाकिस्तानी सेना में कुछ खास लोगों का एक ताकतवर समूह शायद यह मानता था कि अफगानिस्तान को उनके हितों के हिसाब से काम करना चाहिए और अफगानिस्तान की नीति उनके प्रभाव में होनी चाहिए। जब ऐसा नहीं हुआ और अफ़गानिस्तान आज़ाद हो गया, तो उन्होंने साज़िश रचनी शुरू कर दी।"
मुजाहिद ने याद दिलाया कि पाकिस्तानी अधिकारी लगातार दावा करते हैं कि उनके देश में हमले कथित तौर पर अफगान क्षेत्र से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP)* के आतंकवादी अंजाम देते हैं। अक्टूबर में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर कई हमले किए, जिससे दोनों पक्षों के बीच जानलेवा झड़पें हुईं।
मुजाहिद ने जोर देकर कहा, "तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान पाकिस्तान की अंदरूनी समस्या है और यह समूह पाकिस्तान के अंदरूनी क्षेत्र को नियंत्रण करता है।" उन्होंने साथ ही कहा, "अफ़गानिस्तान अपनी नीति के आधार पर अफगान क्षेत्र को दूसरे देशों की सुरक्षा के खिलाफ इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं देगा।"
प्रेस सचिव ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से अफगानिस्तान आए लोग पश्तून हैं, जिन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा अपने इलाकों में किए गए सैन्य अभियान की वजह से अफगानिस्तान में शरण ली है।
मुजाहिद ने ज़ोर देकर कहा, "इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान ने उन्हें डूरंड लाइन से सटे इलाकों से दूसरी जगहों पर भेज दिया है, और उनमें एक भी हथियारबंद आदमी नहीं है।"
*रूस और अन्य देशों में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन