उन्होंने बताया कि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में 2025 के मध्य से लगातार गिरावट देखी जा रही है। जून में जहां कीमतें 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर थीं, वहीं दिसंबर के अंत तक यह 58 डॉलर से नीचे आ गईं। इस गिरावट की बड़ी वजह ओपेक+ का उत्पादन बढ़ाने का फैसला रहा, जिसके तहत समूह ने लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में उतार दी, ताकि बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके।
नए साल के पहले व्यापारी सत्र में शुक्रवार को WTI कच्चा तेल 57.32 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
किलडफ का कहना है कि वेनेजुएला अब तेल बाजार के लिए जोखिम वाला कारक नहीं रहा है और ट्रंप प्रशासन वहां के तेल को या तो सीधे अमेरिकी आपूर्ति में शामिल करना चाहता है या उत्पादन को तेज़ी से बढ़ाने के पक्ष में है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में वैश्विक स्तर पर पहले से मौजूद तेल की अधिक आपूर्ति की कोई परवाह नहीं की जा रही, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने पहले अनुमान जताया था कि इस साल वैश्विक कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति 38 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह अनुमान वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम से पहले लगाया गया था, जिससे बाजार की स्थिति और जटिल हो सकती है।