ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह पैसा सैन्य वाहनों को तैयार करने, संचार व्यवस्था मजबूत करने, ड्रोन हमलों से बचाव और सैनिकों की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों पर लगाया जाएगा। उद्देश्य यह है कि जरूरत पड़ने पर सैनिकों को जल्दी तैनात किया जा सके।
सरकार का कहना है कि यह फंड देश के नियमित रक्षा बजट से दी जा रही है। लंदन इसे नाटो देशों के यूक्रेन में अपनी सेना भेजने की योजनाओं में अगुवाई वाली भूमिका निभाने की संभावना के तौर पर देख रहा है।
इससे पहले रूस ने बार-बार चेतावनी दी है कि यूक्रेन में नाटो देशों के सैनिकों की मौजूदगी रूस की सुरक्षा के लिए खतरा होगी। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि चाहे ऐसे सैनिक किसी भी झंडे के तहत तैनात हों या उन्हें शांति सैनिक कहा जाए, मास्को इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा।