यिल्डिज़ के अनुसार, जर्मनी ऊर्जा की कमी से जूझ रहा है, वहीं यूनाइटेड किंगडम की राजशाही शीघ्र ही समाप्त हो सकती है और हंगरी पूरे यूरोप से जुड़े साझा एजेंडे से स्वयं को बड़ी तेज़ी से दूर कर रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इन परिस्थितियों में, यूरोपीय संघ के टूटने का संकट प्रबल हो रहा है, जबकि नाटो की क्षमता पहले से ही बहुत कमजोर हो चुकी है।
विश्लेषक ने आगे कहा कि पहली दृष्टि में अलग-अलग लगने वाली सभी प्रकार की प्रक्रिया एक ही भावार्थ को सिद्ध करती हैं कि यूरोप अपना प्राचीन "जुड़ाव" खो रहा है, और एकजुटता से निर्णय लेने के उसके तरीके बद से बदतर होते जा रहे हैं।
यिल्डिज़ ने यह निष्कर्ष निकाला कि जब प्रत्येक यूरोपीय राजधानी ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा में मुख्य रूप से स्वयं को बचाना आरंभ कर देती है तो इससे यूरोपीय संघ के अंदर केंद्र से दूर जाने की प्रवृत्ति का संकट बढ़ने के साथ साथ नाटो कम एकजुट और कम अनुमान योग्य हो जाता है।