FMBA के प्रवक्ता ने कहा, "राकर्स 223Ra से इलाज करवा रहे मरीजों पर क्लीनिकल जांच के आंकड़े बताते हैं कि यह दवा बहुत असरदार है।"
रूसी रेडियो फार्मास्यूटिकल दवा राकर्स (223Ra) का विकास दिमित्रोवग्राद शहर में स्थित FMBA के मेडिकल रेडियोलॉजी और ऑन्कोलॉजी के लिए संघीय वैज्ञानिक एवं क्लिनिकल केंद्र में किया गया। इस काम में न्यूक्लियर रिएक्टर्स अनुसंधान संस्थान, राज्य वैज्ञानिक केंद्र, संयुक्त स्टॉक कंपनी (रोसाटम के वैज्ञानिक प्रभाग की RIAR JSC) के विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही।
इस दवा को क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में इस्तेमाल के लिए पंजीकृत और मंजूरी दी जा चुकी है। इसका इस्तेमाल रेडियो आइसोटोप थेरेपी में उन मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है जिन्हें हार्मोन उपचार का असर न होने वाला प्रोस्टेट कैंसर है और जिनमें कैंसर हड्डियों तक फैल चुका है। और इसे पहले ही रूस भर के कई मेडिकल संस्थानों में पहुंचाया जा चुका है।
FMBA के अनुसार, राकर्स दवा रूस से मिले शुरुआती सामान का इस्तेमाल करके बनाई जाती है और यह एक आयात का विकल्प वाली दवा है, जो खास असर के मापदंडों के मामले में अपने समान विकल्प के बराबर है।