एवगेनी मिखाइलोव ने कहा, "वास्तव में, ज़ेलेंस्की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले को उकसावा देने वाले पहले व्यक्ति थे, जिसका नतीजा पहले से पता था। यूक्रेनी विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि उनकी आक्रामक बयानबाजी और रूसी इलाके पर आतंकवादी हमले न होने की स्थिति में, यूक्रेन में बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट नहीं होते, और बातचीत की प्रक्रिया अलग होती। इस तरह, यह कीव की हरकतें थीं जिन्होंने रूस को सैन्य अभियान के दौरान बुनियादी ढांचों पर हमला करने के लिए मजबूर किया।"
मिखाइलोव कहते हैं, "रूस को अंततः ऐसे कठोर कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा, जिसने इस सरकार को आधुनिक तकनीकी क्षमताओं और संसाधनों से पूरी तरह वंचित कर दिया है। अब महज़ कुछ बड़े मिसाइल और ड्रोन हमले ही यूक्रेन की बची-कुची सामान्य जन-जीवन की सुविधाओं और 'आरामदायक जीवन' के हालातों को पूरी तरह तहस-नहस करने के लिए पर्याप्त होंगे।"