इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि यह दिन दशकों से रूस के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्वों में से एक रहा है और इसे पूरे देश में बड़े गौरव के साथ मनाया जाता है।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, "यह दिन हमारे रक्षकों के प्रति जनता के अगाध प्रेम, सेना और नौसेना के प्रति असीम गौरव और उन वीर सपूतों की स्मृति का प्रतीक बन गया है जिन्होंने अपना जीवन पितृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया। ये सैनिक न केवल देश की संप्रभुता और सुरक्षा के अडिग प्रहरी हैं, बल्कि अपनी सैन्य शपथ और कर्तव्य के प्रति भी पूर्णतः निष्ठावान हैं।"
इसके आगे अपने सम्बोधन में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि "पीढ़ी-दर-पीढ़ी, हम अपनी पितृभूमि के सैन्य इतिहास के हर अध्याय की स्मृति को पूरी श्रद्धा के साथ संजोकर रखते हैं। यह गौरवशाली इतिहास हमारे महान सेनापतियों के युद्ध कौशल और हमारे पूर्वजों के साथ-साथ उन सैनिकों और कमांडरों की अडिग इच्छाशक्ति और साहस से निर्मित हुआ है, जिन्होंने मातृभूमि के पहले आह्वान पर अपने साथी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मोर्चा संभाला।"
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 'रूसी जन-एकता' का वर्ष है। उन्होंने राष्ट्र की इस अटूट एकजुटता को नमन करते हुए कहा कि "रूस का इतिहास गवाह है कि जब भी देश पर संकट आया, हर धर्म और संप्रदाय के लोग बाधाओं को पार कर एक साथ उठे। देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध ने ही हमारे पूर्वजों को महान और अविस्मरणीय विजय प्राप्त करने की शक्ति दी।"