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कुर्द विपक्षी दलों ने ईरान के साथ अनाक्रमण संधि पर हस्ताक्षर किए: सूत्र

इराक की सबसे बड़ी कुर्द पार्टी "कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी" के एक सूत्र ने Sputnik को बताया कि कुर्द विपक्षी दल बिना हथियार के हैं और उन्होंने ईरान पर हमला न करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
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मंगलवार को CNN ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरानी कुर्दिश सेना आने वाले दिनों में पश्चिमी ईरान में एक जमीनी अभियान शुरू कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA कथित तौर पर ईरान में एक जन विद्रोह को भड़काने के मकसद से कुर्द सेना को हथियार देने पर काम कर रही है।
गुरुवार को द वॉशिंगटन पोस्ट अखबार ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में कुर्द सेना को देश के पश्चिमी इलाकों पर नियंत्रण करने की कोशिश में सहायता करने के लिए वायु रक्षा प्रणाली की मदद और रसद सहयोग की पेशकश की थी।

सूत्र ने कहा, "ये रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी और बेबुनियाद हैं। वर्तमान में ऐसा कोई कुर्द समूह नहीं जो हथियारबंद हो, वे राजनीतिक दल में बदल गए हैं।"

हालांकि, सूत्र ने बताया कि इन पार्टियों के नेता अभी संयुक्त राज्य अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में रहते हैं।

सूत्र ने आगे कहा, "इन समूह के सदस्यों ने अपने हथियार सौंप दिए और कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार को शर्मिंदा नहीं करने, ईरान पर हमला नहीं करने और बगदाद और तेहरान सरकारों के बीच सुरक्षा समझौते का सम्मान करने के वादे पर हस्ताक्षर किए।"

उन्होंने याद दिलाया कि हथियार कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार को सौंप दिए गए थे, जिसने बदले में उन्हें इराकी सरकार को सौंप दिया था।

सूत्र ने कहा, "पेशमर्गा मिलिशिया बलों के पुनर्गठन के बारे में एरबिल और वॉशिंगटन के बीच सैन्य सहयोग है, लेकिन अगर यह मान भी लें कि अमेरिका ने ऐसा आग्रह किया है, तो मुझे नहीं लगता कि कुर्दिस्तान क्षेत्रीय शासन इसके लिए राज़ी होगा, जो संविधान का उल्लंघन है।"

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान समेत ईरान के ठिकानों पर हमले किए, जिससे नुकसान हुआ और आम लोग मारे गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइली इलाके के साथ-साथ मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य बेस पर भी हमले किए। ईरान के ख़िलाफ़ हमले तब हुए जब ओमान की मध्यस्थता में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जिनेवा में ईरानी परमाणु मुद्दे पर बातचीत हुई थी।
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