रविवार को ब्रसेल्स में मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा कि इस अहम जलमार्ग से भारतीय जहाज़ों के सुरक्षित गुज़रने को लेकर ईरान के साथ बातचीत "जारी है" और "इसके नतीजे भी मिल रहे हैं"।
जयशंकर ने रेखांकित किया कि "अभी मैं उनसे बातचीत करने में लगा हुआ हूँ, और मेरी बातचीत के कुछ नतीजे भी निकले हैं। यह प्रक्रिया अभी जारी है। अगर इससे मुझे नतीजे मिल रहे हैं, तो ज़ाहिर है कि मैं इस पर आगे भी ध्यान देता रहूँगा।"
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ईरान को बदले में कुछ भी मिला है। भारत और ईरान के बीच संबंध हैं। और इस टकराव को हम अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।
गौरतलब है कि जयशंकर की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे अन्य देशों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खुलवाने में अमेरिका की मदद के लिए अपने युद्धपोत भेजने चाहिए।
बता दें कि ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले के बाद से ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को प्रभावी रूप से बंद कर दिए जाने के बाद ऊर्जा की कीमतें तेज़ी से बढ़ गई हैं।