बुलट ने इस बयान को यूरोप, US और कुछ दूसरे देशों में ईरान युद्ध के विरोध के बीच "अपने हितों के लिए समय खरीदने का [व्हाइट हाउस] का रणनीतिक खेल" बताया।
विशेषज्ञ के मुताबिक, इससे पहले अमेरिका द्वारा यूरोप को अपनी तरफ करने की नाकाम कोशिश की, फिर अरब देशों को एक साझा सैन्य कोशिश में शामिल करने का फैसला किया, जिसका कोई फायदा नहीं हुआ।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बमबारी की जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के साथ साथ काफी मात्रा में जान माल की हानि हुई थी।