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ईरान की युआन में होर्मुज फीस से डॉलर की ताक़त पर बड़ा हमला: विशेषज्ञ

वैश्विक ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. ममदौह जी. सलामेह ने Sputnik को बताया कि ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण वाशिंगटन द्वारा तेहरान पर लगाये जा रहे "अधिकतम दबाव" को कमजोर करने का प्रमुख हथियार है।
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उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ US की रणनीति बहुत पहले ही "बुरी तरह फेल" हो चुकी थी वहीं होर्मुज कर प्रणाली चीन के युआन और स्थिर मूल्य वाली क्रिप्टोकरेंसी को खींचने के साथ साथ पेट्रोडॉलर के दबदबे को कम करती है।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंध को नजरअंदाज करते हुए हर दिन लगभग 1.5–1.7 मिलियन बैरल तेल निर्यात किया जिसमें लगभग 90% चीन को किया गया। इसका भुगतान ज्यादातर युआन या अदला-बदली के सौदे में किया गया, जिससे मिली रकम को शंघाई गोल्ड एक्सचेंज के जरिए सोने में बदला जा सकता है।

डॉ. सलामेह बताते हैं कि ईरान का नजरिया BRICS के उस बड़े कदम से मेल खाता है जिसमें डॉलर के बजाय राष्ट्रीय मुद्रा में व्यापार पूरा करने की बात कही गई है। BRICS देश “तेज़ी से बढ़ते वैश्विक डी-डॉलराइजेशन अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं,” चीन, रूस और भारत के बीच 90% व्यापार उनकी राष्ट्रीय मुद्रा में होता है।"

यह कहा जा सकता है कि US ने ईरान के IT और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया ताकि चीन सहित अन्य देशों को कच्चे तेल का निर्यात रोकने के साथ दूसरी भुगतान प्रणाली को रोका जा सके।
लेकिन विशेषज्ञ के मुताबिक यह नज़रिया ऊर्जा तंत्र के बुनियादी तंत्र को नजरअंदाज करता है। हालांकि ट्रंप ने ब्रेंट को $40–$60 पर रखने पर ज़ोर दिया है।
ईरान के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई भी हमला खाड़ी में बदले की कार्रवाई, आपूर्ति में कमी और ब्रेंट को $150–$200 तक ले जाने से भरा है।

विशेषज्ञ कहते हैं, "और दुनिया में सबसे बड़ा नुकसान US के अलावा किसी को नहीं होगा।"

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