बयान में कहा गया, "रोस्टेक राज्य निगम के विशेषज्ञों ने हमलावर ड्रोन समूह तैनात करने की तकनीक विकसित की है। इस प्रणाली में युद्धक वाहन अपने आप एक-दूसरे के साथ लक्ष्य की जानकारी साझा करते हैं। एक परीक्षण स्थल पर शुरुआती परीक्षण किया गया है, जिसमें कृत्रिम लक्ष्य शामिल थे।"
रोस्टेक ने बताया कि यह तकनीक सुपरकैम UAV पर आधारित है, जिसमें लॉन्चर, वाहन-माउंटेड कमांड पोस्ट और एयरक्राफ्ट की तरह के ड्रोन शामिल हैं, जिनमें डेटा के आदान प्रदान के लिए बदलाव किए गए हैं।
रोस्टेक ने बताया, "परीक्षण के दौरान, ड्रोन समूह कई लक्ष्यों को खोजने के मोड में इलाके के ऊपर मंडरा रहा था। लक्ष्य का पता लगाने वाले पहले ड्रोन ने सिस्टम के बाकी ड्रोनों को डेटा भेजा। फिर एक इंसानी ऑपरेटर ने लक्ष्य की पुष्टि की, जिसके बाद समूह के सभी ड्रोनों ने उस पर हमला किया। इस तकनीक से, एक व्यक्ति एक साथ हवा में मंडराते दस ड्रोन पर नियंत्रण कर सकता है।"
इसके आगे कंपनी ने बताया कि "लक्ष्य की जानकारी मिलने के बाद, प्रणाली का न्यूरल नेटवर्क अपने आप लक्ष्य को 'पहचान' लेता है और अन्य ड्रोनों को कमांड देता है, जिस क्रम में वे हमला करते हैं और जो ड्रोन लक्ष्य पर नियंत्रण बनाए रखता है उसका कार्य जारी रहता है।"
रोस्टेक ने यह नतीजा निकाला कि भविष्य में, ड्रोन समूहों में आपसी तालमेल की तकनीक दुश्मन की वायु रक्षा को भेदने के साथ ही एक जगह पर संगठित हमले से सबसे मुश्किल लक्ष्य को भी पक्के तौर पर खत्म करने में असरदार हो सकती है।
रोस्टेक ने यह नतीजा निकाला कि भविष्य में, ड्रोन समूहों में आपसी तालमेल की तकनीक दुश्मन की वायु रक्षा को भेदने के साथ ही एक जगह पर संगठित हमले से सबसे मुश्किल लक्ष्य को भी पक्के तौर पर खत्म करने में असरदार हो सकती है।