उन्होंने यह टिप्पणी निवेशक एरिक नटॉल के ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू पर की। नटॉल ने कहा था कि कच्चे तेल की कीमत जल्द ही 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
दिमित्रिएव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "दुनिया नींद में चलते हुए इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की तरफ बढ़ रही है। अब जाकर कुछ समझदार लोगों ने इस खतरे को पहचानना शुरू किया है।"
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA के प्रमुख फातिह बिरोल ने यूरोप में डीजल और जेट फ्यूल की कमी की चेतावनी दी थी। इसके बाद इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन यानी IATA के डायरेक्टर जनरल विलियम वॉल्श ने कहा था कि जेट फ्यूल की कमी के कारण यूरोप में मई के अंत तक उड़ानें रद्द होनी शुरू हो सकती हैं। कुछ एशियाई देशों में ऐसी स्थिति पहले से देखने को मिल रही है।
ईरान को लेकर बढ़े तनाव के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर पड़ा है। यह फारस की खाड़ी से दुनिया के बाजारों तक तेल और LNG पहुंचाने का अहम रास्ता है। इसका असर तेल के निर्यात और उत्पादन पर भी पड़ा है। सप्लाई बाधित होने से दुनिया के कई देशों में ईंधन और औद्योगिक उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं।