न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी समीक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए बेलौसोव ने कहा, “रूस परमाणु युद्ध के परिणामों को पूरी तरह समझता है। हमें अब भी विश्वास है कि ऐसा युद्ध कभी नहीं छेड़ा जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि रूस ने न्यू स्टार्ट संधि के तहत निर्धारित सीमाओं के अनुसार अपने परमाणु हथियारों के भंडार को सात गुना तक घटाकर एक अधिक सुरक्षित और परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व के निर्माण में योगदान दिया है।
बेलौसोव ने दोहराया, “रूस अंतरराष्ट्रीय समुदाय को परमाणु खतरे से मुक्त करने के विचार के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहा है और आगे भी रहेगा।”
गौरतलब है कि न्यू स्टार्ट संधि 5 फरवरी को समाप्त हो गया। सितंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की थी कि रूस एक वर्ष तक इस संधि की सीमाओं का पालन करने के लिए तैयार है और उन्होंने अमेरिका से भी ऐसा ही करने की अपील की थी। हालांकि, अमेरिका की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई, जिसके बाद यह परमाणु समझौता प्रभावी रूप से समाप्त हो गया।
29 अप्रैल को बेलौसोव ने यह भी कहा था कि रूस अपने आगे के कदम पश्चिमी सैन्य नीतियों और समग्र रणनीतिक स्थिति के विश्लेषण के आधार पर तय करेगा, क्योंकि वाशिंगटन ने मॉस्को के न्यू स्टार्ट संधि के बाद के प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया है।