Sputnik भारत को रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इनमें से एक झुंड में जाने वाले यानि स्वार्म ड्रोन हैं जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के उपकरणों और भ्रमित करने वाली चाफ़ छोड़ने की क्षमता वाला होगा। चाफ़ एल्यूमिनियम के छोटे-छोटे कण होते हैं जिन्हें छोड़कर शत्रु के रडार को धोखा दिया जाता है।
दूसरी तरह के ड्रोन शत्रु की हवाई सुरक्षा के उपकरणों को भ्रमित करने के साथ-साथ गुप्तचरी और जैमिंग की क्षमता वाले होंगे। रक्षा सूत्रों ने बताया कि दोनों ही तरह के ड्रोन स्वदेशी रक्षा उद्योग की सहायता से बनाए जा रहे हैं।
एंटी-रडार डिकॉय झुंड ड्रोन प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) के उपकरणों और चाफ़ छोड़ने की क्षमता से शत्रु की हवाई सुरक्षा को भ्रम में डालेगी। यह सभी ड्रोन 0.9 मैक की तेज़ गति से झुंड में 500 किलोमीटर की दूरी तक जा सकते हैं। ड्रोन किसी भी तरह से EW रेडिएशन को स्वचालित रूप से या योजना के अनुसार ढूंढ सकते हैं और उत्पन्न कर सकते हैं।
बड़ी संख्या में चाफ़ छोड़कर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए एक गलियारा बना सकते हैं जिससे शत्रु की हवाई सुरक्षा को भेदा जा सके। इन्हें बिना किसी रनवे के अलग-अलग जगहों से बहुत बड़ी संख्या में छोड़ा जा सकता है।
लंबे समय से शत्रु की हवाई सुरक्षा को बाधित करना युद्ध में सफलता की कुंजी माना जाता है और अब ड्रोन इसके प्रमुख अस्त्र हो गए हैं। शत्रु की हवाई सुरक्षा की क्षमता को कम करने या दुश्मन की हवाई सुरक्षा के दमन (SEAD) के अभियान मिसाइलों से उन्हें नष्ट करके या उन्हें नकली आक्रमणों के भ्रम में डालकर किए जाते हैं जिससे उनकी क्षमता कम होती जाती है।