व्यापार और अर्थव्यवस्था

मलक्का जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का संकट और वैकल्पिक मार्गों की तलाश

मलक्का जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
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अपनी इसी महत्ता के कारण यह क्षेत्र भविष्य के ऊर्जा संकट का केंद्र बिंदु बन सकता है। यदि यह जलमार्ग बाधित होता है, तो दुनिया के पास सीमित विकल्प ही शेष रहेंगे:
समुद्री मार्ग
इंडोनेशियाई द्वीपसमूह में तीन अवरोध बिंदु अधिक लंबे और महंगे वैकल्पिक मार्ग प्रदान करते हैं:
सुन्दा जलडमरूमध्य (न्यूनतम चौड़ाई ~24 किमी)
लोम्बोक और मकास्सर जलडमरूमध्य (~20 किमी)
तिमोर लेस्ते के पास ओम्बाई और वेटार जलडमरूमध्य (~27 किमी)
उत्तरी समुद्री मार्ग, जो रूस का समुद्री रास्ता है, एशिया में ऊर्जा परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है।
भूमि-आधारित मार्ग
1.
थाईलैंड लैंडब्रिज: क्रा इस्थमस के आर-पार 90 किमी रेल/सड़क/पाइपलाइन लिंक का प्रस्ताव, जो हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है
2.
चीन-म्याँमार आर्थिक गलियारा (CMEC): म्यांमार के माध्यम से हिंद महासागर को चीन से जोड़ने वाली तेल पाइपलाइनें। हालांकि, इसकी क्षमता 4,42,000 बैरल तेल प्रतिदिन है जो मलक्का जलडमरूमध्य के 23.2 मिलियन बैरल तेल प्रतिदिन से बहुत कम है
3.
चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC): ग्वादर बंदरगाह से चीन के शिनजियांग तक 3,600 किमी लंबी प्रस्तावित पाइपलाइन (क्षमता ~10 लाख बैरल प्रतिदिन)
वर्तमान में कोई भी प्रस्तावित मार्ग मलक्का जलडमरूमध्य की जगह नहीं ले सकता, जिससे यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक अवरोध बिंदु बना रहता है।
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