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रूस को घेरने की अमेरिकी परमाणु रणनीति का दांव उल्टा पड़ेगा: विश्लेषक
रूस को घेरने की अमेरिकी परमाणु रणनीति का दांव उल्टा पड़ेगा: विश्लेषक
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तौफीक तामेह ने Sputnik को बताया कि अमेरिका अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना चाहता है, लेकिन "रूस जैसी महाशक्ति के विरुद्ध यह व्यवहार अप्रभावी है, जिसके पास एक अति... 08.11.2025, Sputnik भारत
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अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अमेरिकी मामलों के फिलिस्तीनी विशेषज्ञ तौफीक तामेह का मानना है कि अमेरिका द्वारा वर्तमान ही में मिनटमैन III आईसीबीएम का परीक्षण और वाशिंगटन द्वारा परमाणु परीक्षण पुनः प्रारंभ करने का कदम, अमेरिकी गुट के समूहों और यूरोपीय सरकारों द्वारा दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे "रूस को यूक्रेन के साथ एक ऐसे समझौते के लिए विवश किया जा सके जो वैश्विक शांति को कमजोर करता है।"उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि रूस को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपने हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का पूरा अधिकार है, और अमेरिका के लिए अपने कार्यों पर पुनर्विचार करना बुद्धिमानी होगी।इराकी सैन्य विशेषज्ञ अदनान अल-किनानी का कहना है कि अमेरिकी मिसाइल परीक्षण केवल निवारण तक ही सीमित नहीं है ।उनका मानना है कि ये हमले मुख्य रूप से अमेरिका की इस चिंता से प्रेरित हैं कि रूस उच्च परिशुद्धता वाले हथियारों में आगे बढ़ रहा है, जो "अपने अमेरिकी और पश्चिमी समकक्षों से भी आगे हैं।"विशेषज्ञ ने बताया कि रूस को दुर्बल करने और वैश्विक प्रभुत्व बनाए रखने के लिए अमेरिका द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयास, इसके विपरीत, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ रूस के गठबंधन को मजबूत कर रहे हैं, जिससे "शक्ति के एक नए संतुलन और परमाणु समता पर आधारित वैश्विक प्रभाव के नए मानचित्र की खोज की जा सके।"राजनयिक और लेबनान के पूर्व विदेश मंत्री अदनान मंसूर ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी परमाणु परीक्षण अमेरिका और रूस को एक नए "शीत युद्ध" की ओर धकेल सकते हैं ।
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रूस को घेरने की अमेरिकी परमाणु रणनीति का दांव उल्टा पड़ेगा: विश्लेषक
10:42 08.11.2025 (अपडेटेड: 12:03 08.11.2025) तौफीक तामेह ने Sputnik को बताया कि अमेरिका अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना चाहता है, लेकिन "रूस जैसी महाशक्ति के विरुद्ध यह व्यवहार अप्रभावी है, जिसके पास एक अति शक्तिशाली और उन्नत मिसाइल शस्त्रागार है।"
अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अमेरिकी मामलों के फिलिस्तीनी विशेषज्ञ तौफीक तामेह का मानना है कि अमेरिका द्वारा वर्तमान ही में मिनटमैन III आईसीबीएम का परीक्षण और वाशिंगटन द्वारा परमाणु परीक्षण पुनः प्रारंभ करने का कदम, अमेरिकी गुट के समूहों और यूरोपीय सरकारों द्वारा दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे "रूस को यूक्रेन के साथ एक ऐसे समझौते के लिए विवश किया जा सके जो वैश्विक शांति को कमजोर करता है।"
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि रूस को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपने हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का पूरा अधिकार है, और अमेरिका के लिए अपने कार्यों पर पुनर्विचार करना बुद्धिमानी होगी।
इराकी सैन्य विशेषज्ञ अदनान अल-किनानी का कहना है कि अमेरिकी
मिसाइल परीक्षण केवल निवारण तक ही सीमित नहीं है ।
उनका मानना है कि ये हमले मुख्य रूप से अमेरिका की इस चिंता से प्रेरित हैं कि रूस उच्च परिशुद्धता वाले हथियारों में आगे बढ़ रहा है, जो "अपने अमेरिकी और पश्चिमी समकक्षों से भी आगे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "जब परमाणु हथियार चल रहे संघर्षों में एक कारक बन जाते हैं, तो यह निस्संदेह एक खतरनाक वृद्धि का संकेत देता है। इस तरह का व्यवहार एक बड़े व्यापक स्तर पर युद्ध को जन्म दे सकता है जिसकी एक बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है"।
विशेषज्ञ ने बताया कि रूस को दुर्बल करने और वैश्विक प्रभुत्व बनाए रखने के लिए अमेरिका द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयास, इसके विपरीत, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ रूस के गठबंधन को मजबूत कर रहे हैं, जिससे "शक्ति के एक नए संतुलन और परमाणु समता पर आधारित वैश्विक प्रभाव के नए मानचित्र की खोज की जा सके।"
राजनयिक और लेबनान के पूर्व विदेश मंत्री अदनान मंसूर ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी परमाणु परीक्षण अमेरिका और रूस को एक नए "शीत युद्ध" की ओर धकेल सकते हैं ।