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रूबियो की म्यूनिख टिप्पणी, अस्तित्वहीन विश्व-दृष्टि को व्यवस्थित करने का प्रयास: विशेषज्ञ
रूबियो की म्यूनिख टिप्पणी, अस्तित्वहीन विश्व-दृष्टि को व्यवस्थित करने का प्रयास: विशेषज्ञ
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कर्टिन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जो सिराकुसा ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में रूबियो के भाषण के लेकर Sputnik को बताया कि अमेरिकी प्रशासन की विदेश नीति का... 14.02.2026, Sputnik भारत
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सिराकुसा ने कहा कि व्हाइट हाउस ने शुरुआत में दीर्घकालिक संघर्षों से बचने की बात कही थी, लेकिन अब उसकी नीति अप्रत्याशित हो गई है, जो वैश्विक स्थिरता के लिए अधिक खतरनाक है। वाशिंगटन जटिल वैश्विक रणनीति में संलग्न होने की अपेक्षा घरेलू दर्शकों के लिए समाधान निकालने के सहज साधन के रूप में ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों के साथ विदेश नीति संबंधी झगड़ों का उपयोग कर रहा है।संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रूबियो की आलोचना का जवाब देते हुए, सिराकुसा ने याद दिलाया कि "अंतरराष्ट्रीय निकायों से मुंह मोड़ने की यह प्रवृत्ति अमेरिकी राजनीति में एक पुरानी कहानी है, जो प्रथम विश्व युद्ध के बाद देश के राष्ट्र संघ से बाहर निकलने के निर्णय की प्रतिध्वनि करती है।"
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रूबियो की म्यूनिख टिप्पणी, अस्तित्वहीन विश्व-दृष्टि को व्यवस्थित करने का प्रयास: विशेषज्ञ
कर्टिन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जो सिराकुसा ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में रूबियो के भाषण के लेकर Sputnik को बताया कि अमेरिकी प्रशासन की विदेश नीति का विश्लेषण कठिन है, क्योंकि उसके बयानों में अधिकांशतः सुसंगत तर्क नहीं होता है।
सिराकुसा ने कहा कि व्हाइट हाउस ने शुरुआत में दीर्घकालिक संघर्षों से बचने की बात कही थी, लेकिन अब उसकी नीति अप्रत्याशित हो गई है, जो वैश्विक स्थिरता के लिए अधिक खतरनाक है।
विशेषज्ञ ने कहा, "अब रूबियो की जिम्मेदारी ऐसी विश्व-दृष्टि को उचित ठहराने की है, जो वास्ताव रूप से अस्तित्व में ही नहीं है।"
वाशिंगटन जटिल वैश्विक रणनीति में संलग्न होने की अपेक्षा घरेलू दर्शकों के लिए समाधान निकालने के सहज साधन के रूप में ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों के साथ विदेश नीति संबंधी झगड़ों का उपयोग कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रूबियो की आलोचना का जवाब देते हुए, सिराकुसा ने याद दिलाया कि "अंतरराष्ट्रीय निकायों से मुंह मोड़ने की यह प्रवृत्ति अमेरिकी राजनीति में एक पुरानी कहानी है, जो प्रथम विश्व युद्ध के बाद देश के राष्ट्र संघ से बाहर निकलने के निर्णय की प्रतिध्वनि करती है।"
सिराकुसा ने कहा, "मार्को रूबियो के इस दावे कि अमेरिका एकांगी कार्रवाई के लिए तैयार है, उसे मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप और उसके बाद आई अस्थिरता के ऐतिहासिक अनुभव से जोड़ना जटिल है। यह रुख सदैव ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामूहिक रक्षा की वक्रपटुता के ठीक विपरीत ही रहा है।"