https://hindi.sputniknews.in/20260302/shiirish-nettv-kii-smaapti-ke-baad-bhii-iiriaan-kii-sainik-shkti-bnii-huii-hai-rikshaa-visheshgya--10550493.html
शीर्ष नेतृत्व की समाप्ति के बाद भी ईरान की सैनिक शक्ति बनी हुई है: रक्षा विशेषज्ञ
शीर्ष नेतृत्व की समाप्ति के बाद भी ईरान की सैनिक शक्ति बनी हुई है: रक्षा विशेषज्ञ
Sputnik भारत
अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त आक्रमण में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचने के बाद भी ईरान ने पूरे मध्य-पूर्व में आक्रमण जारी रखे हुए हैं। भारत के मुख्य सैनिक थिंक टैंक सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज (CENJOWS) के महानिदेशक मेजर जनरल अशोक कुमार (सेवानिवृत्त) का मानना है ये आक्रमण ईरान में शक्ति के विकेंद्रीकरण की तैयारी का परिणाम है।
2026-03-02T19:43+0530
2026-03-02T19:43+0530
2026-03-02T19:43+0530
डिफेंस
भारत
ईरान
अमेरिका
इज़राइल
ब्रिटेन
फ्रांस
जर्मनी
मध्य पूर्व
मध्य एशिया
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07ea/03/02/10550823_0:160:3072:1888_1920x0_80_0_0_d407dac97f9a9372d7e3267623b6a677.jpg
जनरल कुमार ने Sputnik इंडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान को इस बात की आशंका थी कि उसके शीर्ष नेतृत्व का सफ़ाया करके उसके पलटवार करने की क्षमता को समाप्त किया जा सकता है।ताज़ा हमलों में अमेरिका को सैन्य दृष्टि से नुकसान पहुंचने के अपुष्ट समाचार भी आ रहे हैं, साथ ही ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अब युद्ध में भाग लेने पर विचार कर रहे हैं।जनरल कुमार का कहना है कि इन देशों को पता है कि उनकी सैन्य शक्ति बहुत कम है इसलिए हर परिस्थिति में अमेरिका का साथ देना ही उनके लिए हितकर है। लेकिन अगर ईरान में अलग-अलग शक्ति केंद्रों द्वारा किए जा रहे ये आक्रमण सफल होते रहे तो यह युद्ध आसानी से समाप्त नहीं होगा
https://hindi.sputniknews.in/20260302/the-us-israel-instigated-war-continues-for-the-third-day-10548465.html
भारत
ईरान
अमेरिका
इज़राइल
फ्रांस
जर्मनी
मध्य पूर्व
मध्य एशिया
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
2026
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
खबरें
hi_IN
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07ea/03/02/10550823_171:0:2902:2048_1920x0_80_0_0_0467a95806aff1b4094b69ac5b0877bf.jpgSputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
भारत, ईरान, अमेरिका, इज़राइल, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, मध्य पूर्व, मध्य एशिया
भारत, ईरान, अमेरिका, इज़राइल, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, मध्य पूर्व, मध्य एशिया
शीर्ष नेतृत्व की समाप्ति के बाद भी ईरान की सैनिक शक्ति बनी हुई है: रक्षा विशेषज्ञ
अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त आक्रमण में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचने के बाद भी ईरान ने पूरे मध्य-पूर्व में आक्रमण जारी रखे हुए हैं। भारत के मुख्य सैनिक थिंक टैंक सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज (CENJOWS) के महानिदेशक मेजर जनरल अशोक कुमार (सेवानिवृत्त) का मानना है ये आक्रमण ईरान में शक्ति के विकेंद्रीकरण की तैयारी का परिणाम है।
जनरल कुमार ने Sputnik इंडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान को इस बात की आशंका थी कि उसके शीर्ष नेतृत्व का सफ़ाया करके उसके पलटवार करने की क्षमता को समाप्त किया जा सकता है।
जनरल कुमार ने कहा, "ईरान को यह आशंका थी इसलिए उसने इसकी तैयारी भी की थी। ईरान ने अपनी शक्ति को विकेंद्रित किया था और अलग-अलग स्थानों पर प्रादेशिक केंद्र बनाए थे। इन केंद्रों के पास ऐसी परिस्थिति में क्या किया जाना है इसके स्पष्ट निर्देश भी थे। इसीलिए शीर्ष केंन्द्रीय नेतृत्व के समाप्त होने के बाद भी ये केंद्र न केवल कार्यरत हैं बल्कि तेज़ी से जवाबी हमले भी करने में सफल हो रहे हैं।"
ताज़ा हमलों में अमेरिका को सैन्य दृष्टि से नुकसान पहुंचने के अपुष्ट समाचार भी आ रहे हैं, साथ ही ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अब युद्ध में भाग लेने पर विचार कर रहे हैं।
जनरल कुमार का कहना है कि इन देशों को पता है कि उनकी सैन्य शक्ति बहुत कम है इसलिए हर परिस्थिति में अमेरिका का साथ देना ही उनके लिए हितकर है। लेकिन अगर ईरान में अलग-अलग शक्ति केंद्रों द्वारा किए जा रहे ये आक्रमण सफल होते रहे तो यह युद्ध आसानी से समाप्त नहीं होगा
जनरल कुमार ने कहा, "ये आक्रमण कितने सफल रहते हैं और कितने दिनों तक चलते हैं यही मुख्य बात है। इससे ईरान के प्रतिरोध को हमेशा के लिए समाप्त करने का अमेरिकी उद्देश्य कभी पूरा नहीं पा पाएगा। अमेरिका के लिए ईरान में सैनिक उतारकर ज़मीन पर युद्ध लड़ना बहुत महंगा पड़ेगा जिससे वह हर स्थिति में बचना चाहेगा।"