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कुछ US सैनिक ईरान अभियान से निराश, 'इज़राइल के लिए नहीं चाहते मरना': रिपोर्ट

© AP Photo / Gregory BullMarines perform in a demonstration with hovercraft and the amphibious assault ship USS Boxer as Vice President JD Vance, not pictured, watches during activities to mark the upcoming Marine Corps' 250th anniversary Saturday, Oct 18, 2025, on Marine Corps Base Camp Pendleton in Camp Pendleton, Calif
Marines perform in a demonstration with hovercraft and the amphibious assault ship USS Boxer as Vice President JD Vance, not pictured, watches during activities to mark the upcoming Marine Corps' 250th anniversary Saturday, Oct 18, 2025, on Marine Corps Base Camp Pendleton in Camp Pendleton, Calif - Sputnik भारत, 1920, 23.03.2026
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प्रकाशन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मध्य पूर्व में वॉशिंगटन के अभियान से जुड़ी अमेरिकी सेना में नाराज़गी के साथ साथ ही सैनिकों के बीच हौसले की दिक्कतों की वजह से अभियान के सफल होने की उम्मीद कम हो सकती है।
हफ़पोस्ट वेबसाइट ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कुछ अमेरिकी सेना के लोग ईरान के खिलाफ़ सैन्य हमले से निराश होकर कह रहे हैं कि वह इजराइल के लिए जान नहीं देना चाहते हैं।
प्रकाशन के मुताबिक सेना के लोगों के साथ रिज़र्व सैनिकों और सैन्य कर्मियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले मानवाधिकार संगठन के साक्षात्कार के बाद दावा किया है कि इस लड़ाई में शामिल कुछ अमेरिकी सेना के लोग कमज़ोरी, बहुत ज़्यादा दबाव, और निराशा की शिकायत कर रहे हैं, यहाँ तक कि वे सेना छोड़ने पर भी विचार कर रहे हैं।
रिपोर्ट में एक रिजर्व और युवा सैनिकों के प्रशिक्षक के हवाले से कहा गया, "मैं सैनिकों के मुँह से ये शब्द सुन रहा हूँ, 'हम इज़राइल के लिए मरना नहीं चाहते और राजनैतिक मोहरे नहीं बनना चाहते।"
आगे रिपोर्ट में बताया गया है कि लड़ाई में शामिल सेना के साथ संपर्क बनाए रखने वाले रिजर्व सैनिक ने भी हफ़पोस्ट से इसी तरह के विचार साझा किए।
प्रकाशन के मुताबिक रिजर्व सैनिक ईरान के खिलाफ युद्ध को सही ठहराने वाली एक जैसी कहानी की कमी को हौसला तोड़ने वाली मुख्य वजह बताई।

शुक्रवार को, CBS न्यूज़ ने जानकार सूत्रों के हवाले से बताया कि पेंटागन ने मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच ट्रंप प्रशासन ने ईरान में ज़मीनी सैनिकों की संभावित तैनाती के लिए विस्तृत योजना तैयार की थी।

अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला करना शुरू किया जिसके जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में इज़राइली इलाके और US के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए।
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