व्यापार और अर्थव्यवस्था

भारत-ब्राज़ील ऊर्जा साझेदारी तेज़: तेल सहयोग से खुलेंगे नए रास्ते

© AP Photo / Matias DelacroixEvana, an oil tanker, is docked at El Palito port in Puerto Cabello, Venezuela, Sunday, Dec. 21, 2025.
Evana, an oil tanker, is docked at El Palito port in Puerto Cabello, Venezuela, Sunday, Dec. 21, 2025.  - Sputnik भारत, 1920, 03.04.2026
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हालिया आँकड़ों से संकेत मिलता है कि भारत और ब्राज़ील के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार मज़बूत हो रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंध वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में नए अवसरों की ओर इशारा करते हैं।
2025 में भारत, ब्राज़ील का दसवाँ सबसे बड़ा आयातक देश था, जबकि कच्चे तेल और बिटुमिनस खनिजों के लिए भारत सातवाँ सबसे बड़ा गंतव्य था। हालांकि, इस वर्ष के पहले दो महीनों में स्थिति में तेज़ बदलाव देखने को मिला। नई दिल्ली ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए चीन के बाद ब्राज़ील के ऊर्जा संसाधनों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बनने की उपलब्धि हासिल की।
इसके अलावा, ब्राज़ील की राष्ट्रीय तेल कंपनी पेट्रोब्रास ने भारत की प्रमुख तेल शोधन कंपनियों — इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड — को तेल की आपूर्ति बढ़ाई है। अनुमान है कि मार्च 2027 तक ब्राज़ील भारत को अपना तेल निर्यात बढ़ाकर 60 मिलियन बैरल तक पहुँचा सकता है, जिसकी कीमत 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकती है।
Mint को दिए एक हालिया इंटरव्यू में भारत में ब्राज़ील के राजदूत केनेथ फेलिक्स हैक्ज़िंस्की दा नोब्रेगा ने कहा कि भारत की विशाल तेल शोधन क्षमता ब्राज़ील की इस क्षेत्र में मौजूद कमी को दूर करने में मदद कर सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ब्राज़ील में भारतीय तेल रिफाइनरी स्थापित करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है, जिससे डीज़ल जैउत्पादों का स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा।
नेवल प्रोजेक्ट्स मैनेजमेंट कंपनी (EMGEPRON) में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ आंद्रे फिगुएरेडो नून्स का मानना है कि इस प्रकार का सहयोग भविष्य में लाभकारी साबित हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालिया समझौतों में ब्राज़ील में भारतीय रिफाइनरियों की स्थापना को लेकर कोई ठोस संकेत नहीं मिला है।
उन्होंने कहा, “भारत के साथ हाल के समझौतों पर आधारित बिज़नेस मॉडल ब्राज़ील के रिफाइनिंग गैप को कम करने के बजाय कच्चे तेल के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अधिक अनुकूल दिखाई देता है।”
विशेषज्ञ के अनुसार, बड़े निर्यातक देशों के बीच संभावित सैन्य संघर्षों के दौरान हुए समझौते और भारत द्वारा रूसी तेल के आयात पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ से भी ब्राज़ील को व्यावसायिक लाभ मिलने की संभावना है।
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