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तान्या साविचेवा की डायरी: AI की नजर में घेराबंदी वाले लेनिनग्राद में एक लड़की का जीवन
तान्या साविचेवा की डायरी: AI की नजर में घेराबंदी वाले लेनिनग्राद में एक लड़की का जीवन
Sputnik भारत
तान्या साविचेवा एक लड़की है, जो लेनिनग्राद की घेराबंदी के कारण 15 साल तक भी जीवित नहीं रह सकी। 09.05.2026, Sputnik भारत
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1941 की गर्मियों में साविचेव परिवार लेनिनग्राद से चले जाने की योजना बना रहा था, लेकिन वे समय पर निकल नहीं पाए, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गई। उनके पास घेराबंदी वाले शहर में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने सैनिकों की मदद करने का निर्णय लिया। एक नोटबुक तान्या को उसकी बड़ी बहन नीना की याद में मिली, जो गोलाबारी के दौरान गुम हो गई थी। तब तान्या ने अपने परिवार के सदस्यों की मौतों के बारे में अपने नोट करना शुरू किया।यह नोटबुक नूर्नबर्ग परीक्षण में नाज़ी अपराधों के सबूत के रूप में पेश की गई थी।नूर्नबर्ग परीक्षण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945-1946 में जर्मनी के नूर्नबर्ग में नाजी युद्ध अपराधियों के खिलाफ चलाया गया ऐतिहासिक मुकदमा था। यह पहली बार था जब जंग के अपराधियों को कठघरे में खड़ा किया गया था।1 जनवरी, 1941 साल के आंकड़ों के अनुसार, रूसी शहर लेनिनग्राद में लगभग 30 लाख लोग रहते थे। नाजी सेना द्वारा की गई घेराबंदी के दौरान, लगभग 10 लाख लोग मारे गए। उनमें से केवल 3% की मौत बमबारी और गोलाबारी के कारण हुई थी, शेष 97% की मौत भूख से हुई थी।
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तान्या साविचेवा एक लड़की है, जो लेनिनग्राद की घेराबंदी के कारण 15 साल तक भी जीवित नहीं रह सकी।
1941 की गर्मियों में साविचेव परिवार लेनिनग्राद से चले जाने की योजना बना रहा था, लेकिन वे समय पर निकल नहीं पाए, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गई। उनके पास घेराबंदी वाले शहर में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने सैनिकों की मदद करने का निर्णय लिया।
एक नोटबुक तान्या को उसकी बड़ी बहन नीना की याद में मिली, जो गोलाबारी के दौरान गुम हो गई थी। तब तान्या ने अपने परिवार के सदस्यों की मौतों के बारे में अपने नोट करना शुरू किया।
यह नोटबुक नूर्नबर्ग परीक्षण में नाज़ी अपराधों के सबूत के रूप में पेश की गई थी।
नूर्नबर्ग परीक्षण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945-1946 में जर्मनी के नूर्नबर्ग में नाजी युद्ध अपराधियों के खिलाफ चलाया गया ऐतिहासिक मुकदमा था। यह पहली बार था जब जंग के अपराधियों को कठघरे में खड़ा किया गया था।
1 जनवरी, 1941 साल के आंकड़ों के अनुसार, रूसी शहर लेनिनग्राद में लगभग 30 लाख लोग रहते थे। नाजी सेना द्वारा की गई
घेराबंदी के दौरान, लगभग 10 लाख लोग मारे गए। उनमें से केवल 3% की मौत बमबारी और गोलाबारी के कारण हुई थी, शेष 97% की मौत भूख से हुई थी।