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वियतनाम को ब्रह्मोस निर्यात की स्वीकृति अगले माह, लगभग 2900 करोड़ रुपए का होगा कुल सौदा: सूत्र
वियतनाम को ब्रह्मोस निर्यात की स्वीकृति अगले माह, लगभग 2900 करोड़ रुपए का होगा कुल सौदा: सूत्र
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वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात करने पर जून में अंतिम मोहर लग सकती है। उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों से स्पुतनिक को मिली जानकारी के अनुसार यह सौदा 2900 करोड़ रुपए (300 मिलियन डॉलर) का हो सकता है।
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सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार वियतनाम अपनी समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए ब्रह्मोस की तैनाती करना चाहता है। वियतनाम को निर्यात होने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों का प्रयोग शत्रु के युद्धपोतों विरुद्ध किया जा सकता है। सौदे में मिसाइल फायरिंग यूनिट, कमान और नियंत्रण यूनिट, रडार और दूसरे सहायक वाहन होंगे।युद्धपोत रोधी ब्रह्मोस मिसाइलों का प्रयोग भारतीय नौसेना लगभग दो दशक से कर रही है। भारतीय नौसेना के लगभग सभी अग्रिम युद्धपोत ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस हैं।5 मई से 7 मई तक वियतनाम के राष्ट्रपति और अधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया था। भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह दो दिवसीय दौरे पर 18 मई को ही वियतनाम पहुंचे हैं।ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का निर्माण भारत और रूस साथ मिलकर करते हैं। ब्रह्मोस का प्रयोग भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों ही करती हैं। इसकी आरंभिक 290 किमी की मारक क्षमता को बढ़ाकर 800 किमी तक किया जा चुका है।यह निर्यात ब्रह्मोस का दूसरा निर्यात होगा, साथ ही यह भारत का भी दूसरा बड़ा रक्षा निर्यात होगा। इससे पहले भारत ने 2021 में फिलीपींस को ब्रह्मोस का पहला निर्यात किया था जो लगभग इसी मूल्य का था।पिछले वर्ष मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में ब्रह्मोस मिसाइलों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। इस संघर्ष में भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 पर लगी ब्रह्मोस का प्रयोग पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों के ठिकानों पर किया था जो अचूक सिद्ध हुआ था। इस संघर्ष के बाद दुनिया के कई देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल में रुचि दिखाई है।
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वियतनाम को ब्रह्मोस निर्यात की स्वीकृति अगले माह, लगभग 2900 करोड़ रुपए का होगा कुल सौदा: सूत्र
19:31 18.05.2026 (अपडेटेड: 19:39 18.05.2026) वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात करने पर जून में अंतिम मोहर लग सकती है। उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार यह सौदा 2900 करोड़ रुपए (300 मिलियन डॉलर) का हो सकता है।
सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार वियतनाम अपनी समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए ब्रह्मोस की तैनाती करना चाहता है। वियतनाम को निर्यात होने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों का प्रयोग शत्रु के युद्धपोतों विरुद्ध किया जा सकता है। सौदे में मिसाइल फायरिंग यूनिट, कमान और नियंत्रण यूनिट, रडार और दूसरे सहायक वाहन होंगे।
युद्धपोत रोधी ब्रह्मोस मिसाइलों का प्रयोग
भारतीय नौसेना लगभग दो दशक से कर रही है। भारतीय नौसेना के लगभग सभी अग्रिम युद्धपोत ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस हैं।
5 मई से 7 मई तक वियतनाम के राष्ट्रपति और अधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया था। भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
दो दिवसीय दौरे पर 18 मई को ही वियतनाम पहुंचे हैं।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का निर्माण भारत और रूस साथ मिलकर करते हैं। ब्रह्मोस का प्रयोग भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों ही करती हैं। इसकी आरंभिक 290 किमी की मारक क्षमता को बढ़ाकर 800 किमी तक किया जा चुका है।
यह निर्यात ब्रह्मोस का दूसरा निर्यात होगा, साथ ही यह भारत का भी दूसरा बड़ा रक्षा निर्यात होगा। इससे पहले भारत ने 2021 में
फिलीपींस को ब्रह्मोस का पहला निर्यात किया था जो लगभग इसी मूल्य का था।
पिछले वर्ष मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में ब्रह्मोस मिसाइलों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। इस संघर्ष में भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 पर लगी ब्रह्मोस का प्रयोग पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों के ठिकानों पर किया था जो अचूक सिद्ध हुआ था। इस संघर्ष के बाद दुनिया के कई देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल में रुचि दिखाई है।