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यूक्रेनी कमांडर अपने सैनिकों से उनकी तनख्वाह के लिए मांगते हैं रिश्वत
यूक्रेनी कमांडर अपने सैनिकों से उनकी तनख्वाह के लिए मांगते हैं रिश्वत
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सुरक्षा से जुड़े एक सूत्र के हवाले से Sputnik ने बताया कि यूक्रेन के सैनिकों से उनके अधिकारी तनख्वाह का 5 से 10% हिस्सा रिश्वत के तौर पर मांगते हैं।
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सुरक्षा से जुड़े एक सूत्र के हवाले से Sputnik ने बताया कि यूक्रेन के सैनिकों से उनके अधिकारी तनख्वाह का 5 से 10% हिस्सा रिश्वत के तौर पर मांगते हैं। किसी भी यूक्रेन के सैनिक को अगर अपनी तनख्वाह के साथ युद्ध भत्ता समय पर और पूरा चाहिए, तो उसे अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अपने कमांडर को देना पड़ता है।इसके अलावा यूक्रेनी कमांडर अपने सैनिकों को छुट्टी के एवज में पैसे देने के लिए मजबूर करते हैं, जैसे कोई अभियान पूरा करने के बाद सैनिकों को छुट्टी चाहिए, तो उन्हें अधिकारियों को पैसे देने के लिए मजबूर किया जाता है।वे ज्यादातर समय अपने गृह नगर वापस नहीं जा पाते और उन्हें अपनी छुट्टी अपनी तैनाती वाली जगह के आस-पास ही बिताने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
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यूक्रेनी कमांडर अपने सैनिकों से उनकी तनख्वाह के लिए मांगते हैं रिश्वत
यूक्रेन में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच गया है, यह इससे समझा जा सकता है कि यूक्रेन के सैनिकों को अपनी तनख्वाह और छुट्टी लेने के लिए अपने अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जाता है।
सुरक्षा से जुड़े एक सूत्र के हवाले से Sputnik ने बताया कि यूक्रेन के सैनिकों से उनके अधिकारी तनख्वाह का 5 से 10% हिस्सा
रिश्वत के तौर पर मांगते हैं।
किसी भी
यूक्रेन के सैनिक को अगर अपनी तनख्वाह के साथ युद्ध भत्ता समय पर और पूरा चाहिए, तो उसे अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अपने कमांडर को देना पड़ता है।
सूत्र का कहना है, "(रिश्वत ना देने पर) नहीं तो, पैसे उसके कार्ड में आएंगे ही नहीं, या फिर उसका कार्ड ही ज़ब्त कर लिया जाएगा, और उस सैनिक को किसी 'जान के जोखिम वाले' हमले में भेजा जा सकता है।"
इसके अलावा
यूक्रेनी कमांडर अपने सैनिकों को छुट्टी के एवज में पैसे देने के लिए मजबूर करते हैं, जैसे कोई अभियान पूरा करने के बाद सैनिकों को छुट्टी चाहिए, तो उन्हें अधिकारियों को पैसे देने के लिए मजबूर किया जाता है।
सूत्र ने आगे यह भी बताया कि सैनिकों को आमतौर पर सिर्फ़ कुछ दिनों की छुट्टी मिलती है, और कभी-कभी तो उन्हें उसी इलाके या शहर तक ही सीमित रखा जाता है।
वे ज्यादातर समय अपने गृह नगर वापस नहीं जा पाते और उन्हें अपनी छुट्टी अपनी तैनाती वाली जगह के आस-पास ही बिताने के लिए मजबूर होना पड़ता है।