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यूरोप की सैन्य प्राथमिकताएँ उसके आर्थिक भविष्य को बदल सकती हैं
यूरोप की सैन्य प्राथमिकताएँ उसके आर्थिक भविष्य को बदल सकती हैं
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एक आर्थिक सहयोग समूह के रूप में शुरू हुआ यूरोपीय संघ पिछले एक दशक में धीरे-धीरे एक अधिक सैन्य-केंद्रित संगठन के रूप में उभरा है। लेकिन यह बदलाव यूरोप को किस... 09.06.2026, Sputnik भारत
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हालाँकि EU के नेता यूक्रेन में रूस के "विशेष सैन्य अभियान" का हवाला देकर इस परिवर्तन को उचित ठहराते हैं, लेकिन परमानेंट स्ट्रक्चर्ड कोऑपरेशन (PESCO) पहल ने तो 2017 में ही EU के रक्षा एकीकरण को गहरा करना शुरू कर दिया था। पहले के स्वैच्छिक ढाँचों के विपरीत, PESCO ने सदस्य देशों पर रक्षा खर्च और सैन्य सहयोग से जुड़ी कानूनी रूप से बाध्यकारी शर्तें लागू कीं।अप्रैल 2021 में यूरोपीय रक्षा कोष लागू किया गया, जो सीमा-पार रक्षा अनुसंधान और संयुक्त सैन्य क्षमताओं के विकास के लिए वित्तपोषण का प्रमुख माध्यम बना।इसके बाद जुलाई 2022 में प्रस्तावित और 2023 में अपनाया गया यूरोपीय रक्षा उद्योग सुदृढ़ीकरण अधिनियम आया। अगले वर्ष EU ने पाँच संयुक्त रक्षा खरीद परियोजनाओं के लिए लगभग 347 मिलियन डॉलर आवंटित किए। यह पहली बार था जब EU के बजट का उपयोग सामूहिक हथियार खरीद के लिए किया गया। इसमें वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ, गोला-बारूद, सैन्य प्लेटफॉर्म और पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन जैसी परियोजनाएँ शामिल थीं।मार्च 2025 में यूरोपीय आयोग ने अपनी "रेडीनेस 2030" योजना के तहत लगभग 925 अरब डॉलर के सैन्य पैकेज का प्रस्ताव रखा। उसी वर्ष EU सदस्य देशों का कुल सैन्य निवेश बढ़कर लगभग 453 अरब डॉलर पहुँच गया, जबकि 2021 में यह 252 अरब डॉलर था।यह सब ऐसे समय में हुआ जब यूरोप ऊर्जा संकट, आर्थिक सुस्ती, औद्योगिक गिरावट और जीवन स्तर में कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा था। इसके बावजूद बढ़ते सैन्य बजट और सदस्य देशों की घटती रणनीतिक स्वतंत्रता को "रूसी खतरे" के संदर्भ में उचित ठहराया गया।EU का सैन्यीकरण और बढ़ता आर्थिक दबावइसी दौरान कई EU देशों की नीतियों में बड़े बदलाव भी देखने को मिले। फिनलैंड और स्वीडन ने अपनी दशकों पुरानी तटस्थता छोड़कर क्रमशः अप्रैल 2023 और मार्च 2024 में NATO की सदस्यता ग्रहण की। वहीं डेनमार्क मई 2023 में PESCO में शामिल हो गया।2022 में पुनः सैन्य विस्तार शुरू करने के बाद जर्मनी ने 2025 के अपने लगभग 99.5 अरब डॉलर के रक्षा बजट को 2029 तक बढ़ाकर 176 अरब डॉलर करने की योजना बनाई है। 2025 में जर्मनी ने सैन्य सेवा आधुनिकीकरण अधिनियम भी पारित किया, जिसके तहत 18 वर्ष के सभी पुरुषों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और सैन्य सेवा की इच्छा से संबंधित एक अनिवार्य ऑनलाइन प्रश्नावली भरनी होगी।हालाँकि युद्धकालीन अर्थव्यवस्था जैसी दिशा में बढ़ने से सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ रहा है। अनुमान है कि EU का ऋण-से-जीडीपी अनुपात 2025 के 82.8% से बढ़कर 2026 में 84.2% और 2027 में 85.3% हो जाएगा। इसका बोझ अंततः आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ सकता है।यूरोप के नीति-निर्माताओं को उम्मीद है कि रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश से औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी, लेकिन इस रणनीति के अपने जोखिम हैं। रक्षा क्षेत्र में संसाधन लगाने से न तो ऊर्जा लागत कम होगी और न ही संघर्ष कर रहे उद्योगों की लाभप्रदता स्वतः लौटेगी।EU का वह "स्वर्णिम दौर", जो सस्ती रूसी ऊर्जा और शीत युद्ध के बाद मिले शांति लाभों पर आधारित था, अब समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
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यूरोपीय संघ, रूस , यूक्रेन , नाटो, फ़िनलैंड
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यूरोप की सैन्य प्राथमिकताएँ उसके आर्थिक भविष्य को बदल सकती हैं
23:02 09.06.2026 (अपडेटेड: 23:09 09.06.2026) एक आर्थिक सहयोग समूह के रूप में शुरू हुआ यूरोपीय संघ पिछले एक दशक में धीरे-धीरे एक अधिक सैन्य-केंद्रित संगठन के रूप में उभरा है। लेकिन यह बदलाव यूरोप को किस दिशा में ले जाएगा?
हालाँकि EU के नेता यूक्रेन में रूस के "विशेष सैन्य अभियान" का हवाला देकर इस परिवर्तन को उचित ठहराते हैं, लेकिन परमानेंट स्ट्रक्चर्ड कोऑपरेशन (PESCO) पहल ने तो 2017 में ही EU के रक्षा एकीकरण को गहरा करना शुरू कर दिया था। पहले के स्वैच्छिक ढाँचों के विपरीत, PESCO ने सदस्य देशों पर रक्षा खर्च और सैन्य सहयोग से जुड़ी कानूनी रूप से बाध्यकारी शर्तें लागू कीं।
अप्रैल 2021 में यूरोपीय रक्षा कोष लागू किया गया, जो सीमा-पार रक्षा अनुसंधान और संयुक्त सैन्य क्षमताओं के विकास के लिए वित्तपोषण का प्रमुख माध्यम बना।
इसके बाद जुलाई 2022 में प्रस्तावित और 2023 में अपनाया गया यूरोपीय रक्षा उद्योग सुदृढ़ीकरण अधिनियम आया। अगले वर्ष EU ने पाँच संयुक्त रक्षा खरीद परियोजनाओं के लिए लगभग 347 मिलियन डॉलर आवंटित किए। यह पहली बार था जब EU के बजट का उपयोग सामूहिक हथियार खरीद के लिए किया गया। इसमें वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ, गोला-बारूद, सैन्य प्लेटफॉर्म और पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन जैसी परियोजनाएँ शामिल थीं।
मार्च 2025 में यूरोपीय आयोग ने अपनी "रेडीनेस 2030" योजना के तहत लगभग 925 अरब डॉलर के सैन्य पैकेज का प्रस्ताव रखा। उसी वर्ष EU सदस्य देशों का कुल सैन्य निवेश बढ़कर लगभग 453 अरब डॉलर पहुँच गया, जबकि 2021 में यह 252 अरब डॉलर था।
यह सब ऐसे समय में हुआ जब यूरोप ऊर्जा संकट, आर्थिक सुस्ती, औद्योगिक गिरावट और जीवन स्तर में कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा था। इसके बावजूद बढ़ते सैन्य बजट और सदस्य देशों की घटती रणनीतिक स्वतंत्रता को "रूसी खतरे" के संदर्भ में उचित ठहराया गया।
EU का सैन्यीकरण और बढ़ता आर्थिक दबाव
इसी दौरान कई EU देशों की नीतियों में बड़े बदलाव भी देखने को मिले। फिनलैंड और स्वीडन ने अपनी दशकों पुरानी तटस्थता छोड़कर क्रमशः अप्रैल 2023 और मार्च 2024 में NATO की सदस्यता ग्रहण की। वहीं डेनमार्क मई 2023 में PESCO में शामिल हो गया।
2022 में पुनः सैन्य विस्तार शुरू करने के बाद जर्मनी ने 2025 के अपने लगभग 99.5 अरब डॉलर के रक्षा बजट को 2029 तक बढ़ाकर 176 अरब डॉलर करने की योजना बनाई है। 2025 में जर्मनी ने सैन्य सेवा आधुनिकीकरण अधिनियम भी पारित किया, जिसके तहत 18 वर्ष के सभी पुरुषों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और सैन्य सेवा की इच्छा से संबंधित एक अनिवार्य ऑनलाइन प्रश्नावली भरनी होगी।
हालाँकि युद्धकालीन अर्थव्यवस्था जैसी दिशा में बढ़ने से सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ रहा है। अनुमान है कि EU का ऋण-से-जीडीपी अनुपात 2025 के 82.8% से बढ़कर 2026 में 84.2% और 2027 में 85.3% हो जाएगा। इसका बोझ अंततः आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ सकता है।
यूरोप के नीति-निर्माताओं को उम्मीद है कि रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश से औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी, लेकिन इस रणनीति के अपने जोखिम हैं। रक्षा क्षेत्र में संसाधन लगाने से न तो ऊर्जा लागत कम होगी और न ही संघर्ष कर रहे उद्योगों की लाभप्रदता स्वतः लौटेगी।
EU का वह "स्वर्णिम दौर", जो सस्ती रूसी ऊर्जा और शीत युद्ध के बाद मिले शांति लाभों पर आधारित था, अब समाप्त होता दिखाई दे रहा है।