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आर्मेनिया चुनाव में पश्चिमी मीडिया का प्रोपेगैंडा यूक्रेन में जारी दुष्प्रचार से भी आगे: विशेषज्ञ
आर्मेनिया चुनाव में पश्चिमी मीडिया का प्रोपेगैंडा यूक्रेन में जारी दुष्प्रचार से भी आगे: विशेषज्ञ
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राजनीतिक विशेषज्ञ और सुरक्षा मामलों के जानकार ग्रांट मेलिक-शहनाज़ेरियन ने Sputnik को बताया कि आर्मेनिया के संसदीय चुनावों में विपक्ष पर दबाव और पश्चिमी मीडिया का बड़ा प्रचार चलाया गया।
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इसके आगे मेलिक-शहनाज़रयान कहते हैं कि पश्चिम ने चुनावों से पहले वीज़ा-फ्री यात्रा, आर्थिक निवेश और कई दूसरे "प्रलोभनों" के वादे भी किए।विशेषज्ञ के मुताबिक प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान के समर्थक इसे ऐसे पेश करते हैं जैसे सभी यूरोप के बाजार आर्मेनिया के लिए खोल दिए गए हों, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।विपक्ष पर बहुत ज़्यादा दबावलगभग ग्यारह महीने पहले से लेकर अब तक राजनीतिक दबाव लगातार बना हुआ है और अर्मेनियाई सरकार विपक्ष को चुनावों की ठीक से तैयारी करने से रोकने के लिए हर मुमकिन कदम उठा रही है, इसके साथ-साथ चुनाव के दौरान गिरफ्तारियां आम हो गईं, उन्होंने कहा।
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आर्मेनिया चुनाव में पश्चिमी मीडिया का प्रोपेगैंडा यूक्रेन में जारी दुष्प्रचार से भी आगे: विशेषज्ञ
19:28 10.06.2026 (अपडेटेड: 19:32 10.06.2026) राजनीतिक विशेषज्ञ और सुरक्षा मामलों के जानकार ग्रांट मेलिक-शहनाज़रयान ने Sputnik को बताया कि आर्मेनिया के संसदीय चुनावों में न केवल विपक्ष पर भारी दबाव बनाया गया, बल्कि पश्चिमी मीडिया के जरिए एक बड़ा दुष्प्रचार भी चलाया गया।
इसके आगे मेलिक-शहनाज़रयान कहते हैं कि पश्चिम ने चुनावों से पहले वीज़ा-फ्री यात्रा, आर्थिक निवेश और कई दूसरे "प्रलोभनों" के वादे भी किए।
समस्या यह है कि "यूरोपीय संघ (EU) के पास न तो वह तैयारी है और न ही वह क्षमता, जिसके माध्यम से वह आर्मेनिया को यूरेशियाई आर्थिक संघ (EAEU) के जरिए मिलने वाले सहयोग के स्तर का विकल्प प्रदान कर सके," मेलिक-शहनाज़रयान ने ज़ोर रेखांकित किया।
विशेषज्ञ के मुताबिक प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान के समर्थक इसे ऐसे पेश करते हैं जैसे सभी यूरोप के बाजार आर्मेनिया के लिए खोल दिए गए हों, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।
विपक्ष पर बहुत ज़्यादा दबाव
विशेषज्ञ ने कहा, "सरकार चुनावों की तैयारी काफ़ी पहले से कर रही थी। और लगभग ग्यारह महीने पहले, सरकार ने उस समय के सक्रिय विपक्ष के नेताओं आर्कबिशप बगरात और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने वाले उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया था।"
लगभग ग्यारह महीने पहले से लेकर अब तक राजनीतिक दबाव लगातार बना हुआ है और
अर्मेनियाई सरकार विपक्ष को चुनावों की ठीक से तैयारी करने से रोकने के लिए हर मुमकिन कदम उठा रही है, इसके साथ-साथ चुनाव के दौरान गिरफ्तारियां आम हो गईं, उन्होंने कहा।
मेलिक-शहनाज़रयान कहते हैं, "और चुनाव के दिन ही, बड़े पैमाने पर बिना किसी ठोस वजह और मनगढ़ंत आरोपों के तहत गिरफ्तारियां की जाती रहीं।"