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मेक इन इंडिया सर्वर विकसित करेंगी भारतीय और रूसी कंपनियां

© AP Photo / Manish SwarupRussian President Vladimir Putin, left, and Indian Prime Minister Narendra Modi greet each other before their meeting in New Delhi, India on Dec. 6, 2021.
Russian President Vladimir Putin, left, and Indian Prime Minister Narendra Modi greet each other before their meeting in New Delhi, India on Dec. 6, 2021. - Sputnik भारत, 1920, 07.07.2026
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इंडो-रशिया ‘इनोप्राक्टिका’ टेक्नोलॉजी हब ने मंगलवार को दिल्ली में ‘सॉवरेन सिक्योर इन्फ्रास्ट्रक्चर लैब’ का उद्घाटन किया। भारतीय बाजार के लिए पहले मेक इन इंडिया सर्वर अगले साल तक पेश किए जा सकते हैं।
भारतीय और रूसी संस्थाएं मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत सर्वर, सेमीकंडक्टर चिप और एकीकृत संचार प्लेटफॉर्म सहित सॉवरेन टेक्नोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए साथ आई हैं।
इंडो-रशिया ‘इनोप्राक्टिका’ टेक्नोलॉजी हब ने AIRavata हाई-परफॉर्मेंस सर्वर, WULAR और DISHA सेमीकंडक्टर चिप्स और बिजनेस कम्युनिकेशन के लिए TAAR एकीकृत प्लेटफॉर्म पेश किया है। ये सभी “सॉवरेन और सुरक्षित इन्फ्रास्ट्रक्चर” तैयार करने की पहल का हिस्सा हैं।
इनोप्राक्टिका के प्रतिनिधियों ने Sputnik India को बताया कि रूसी डीप टेक विशेषज्ञता की मदद से Foreseer AI द्वारा सह-विकसित इस सॉवरेन इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारतीय उद्योग और सरकारी एजेंसियों, जिनमें सशस्त्र बल भी शामिल हैं, के सामने पहले ही पेश किया जा चुका है।
उनके मुताबिक, कस्टम-बिल्ट, डिफेंस-ग्रेड सॉवरेन सर्वर चीनी हार्डवेयर पर निर्भरता कम करने में सीधे योगदान देंगे और आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप होंगे।
उन्होंने कहा, "यह परियोजना रक्षा, महत्वपूर्ण अवसंरचना, डेटा सेंटरों और सरकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए तैयार की जा रही है।"
मेक इन इंडिया सर्वरों के महत्व पर बात करते हुए इंडो-रशिया इनोप्राक्टिका टेक्नोलॉजी हब के CEO देबजीत चक्रवर्ती ने कहा कि भारत के लिए देश में तैनात किए जा रहे तकनीकी सिस्टम पर सॉवरेन नियंत्रण रखना जरूरी हो गया है।
चक्रवर्ती ने कहा, "सर्वर किसी भी तकनीकी सिस्टम के केंद्र में होता है। AI हो या कोई भी नई तकनीक, जिन बेस सिस्टम पर डेटा रहता है, उन पर नियंत्रण होना बेहद जरूरी है।"
चक्रवर्ती के अनुसार, रूसी कंपनियां और सरकार भारत के साथ अपनी “डीप टेक विशेषज्ञता” साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसमें बौद्धिक संपदा अधिकार और सोर्स कोड भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सॉवरेन टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर से न सिर्फ भारत को फायदा होगा, बल्कि दोनों देश आगे चलकर अपने तकनीकी उत्पादों को BRICS देशों और ग्लोबल साउथ के साथ भी साझा कर सकते हैं।
चक्रवर्ती ने बताया कि इस परियोजना को भारत सरकार और उद्योग जगत से “बहुत अच्छी प्रतिक्रिया” मिल रही है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग, विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन और कई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों को इस परियोजना के “रणनीतिक साझेदार” के रूप में जोड़ा जा चुका है।
उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया सर्वर अगले साल तक भारतीय बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं।
चक्रवर्ती ने कहा, "हम रूस की कुछ कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं। हम उनके सर्वर भारत ला रहे हैं और देख रहे हैं कि उन्हें किस तरह स्थानीय बनाया जा सकता है। शायद 2027 तक हम ऐसा होते देख सकें।"
इनोप्राक्टिका की सॉवरेन इन्फ्रास्ट्रक्चर लैब के सलाहकार और प्रमुख चंद्रकुमार चेट्टियार ने कहा कि भारत में “डेटा सेंटर बूम” के कारण सर्वरों के आयात के बजाय देश में ही उनका निर्माण जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि रूस से आयात किए गए चिप सेटों को भारत में पहले ही “स्थानीय” बनाया जा रहा है।
चेट्टियार ने कहा, "हम रूस की तकनीकी बढ़त का लाभ उठाकर कुछ बहुत अनूठा विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।"
दिल्ली में रूसी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय में GR और वित्त क्षेत्र की प्रमुख ज़्लाटा अंतुशेवा ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारत से रूस को तकनीकी निर्यात बढ़ने से दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करने में मदद मिल सकती है।
पिछले दिसंबर में दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सह-अध्यक्षता में हुए 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी, खासकर उन्नत हाई-टेक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया था।
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