यूक्रेन संकट
मास्को ने डोनबास के लोगों को, खास तौर पर रूसी बोलनेवाली आबादी को, कीव के नित्य हमलों से बचाने के लिए फरवरी 2022 को विशेष सैन्य अभियान शुरू किया था।

FSB ने टेलीग्राम संस्थापक पावेल दुरोव को अंतरराष्ट्रीय वांछित सूची में डाला

© AP Photo / Tatan SyuflanaTelegram co-founder Pavel Durov speaks during a press conference following his meeting with Indonesian Communication and Information Minister Rudiantara in Jakarta, Indonesia Tuesday, Aug. 1, 2017.
Telegram co-founder Pavel Durov speaks during a press conference following his meeting with Indonesian Communication and Information Minister Rudiantara in Jakarta, Indonesia Tuesday, Aug. 1, 2017.  - Sputnik भारत, 1920, 29.07.2026
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रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) ने टेलीग्राम (Telegram) के संस्थापक पावेल दुरोव को अंतरराष्ट्रीय वांछित सूची में डाल दिया है। उनके खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में सहायता के आरोप में आपराधिक मामला चल रहा है।
FSB के अनुसार, टेलीग्राम ने उन चैनलों, चैट और बॉट को नहीं हटाया, जिनका यूक्रेनी विशेष सेवाएं रूस में तोड़फोड़, आतंकवादी हमलों, सामूहिक हत्याओं और साइबर धोखाधड़ी की तैयारी के लिए इस्तेमाल कर रही थीं।
बयान में कहा गया कि इन गतिविधियों के कारण महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों की मौत हुई और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ।
FSB ने टेलीग्राम के डेटिंग बॉट LeoMatch का भी उल्लेख किया, जिसे रूस में "डायविनचिक" के नाम से जाना जाता है। एजेंसी का कहना है कि यूक्रेनी विशेष सेवाओं ने इस बॉट के जरिए रूसी युवाओं को धोखे से अपने जाल में फंसाया और उन्हें तोड़फोड़ तथा आतंकवादी गतिविधियों में शामिल किया।
FSB के अनुसार, यूक्रेनी खुफिया एजेंट युवतियों के नाम से रूसी युवकों से ऑनलाइन बातचीत शुरू करते थे। इसके बाद वे किसी बड़े शॉपिंग सेंटर या सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण स्थल के पास मिलने का प्रस्ताव देते और उस जगह की लोकेशन पहले ही मंगवा लेते थे।
एजेंट सिनेमा या कॉन्सर्ट के टिकट और उपहार देने के बहाने फिशिंग लिंक भी भेजते थे। इसके बाद कीव से जुड़े लोग युवकों से संपर्क करते और खुद को रूसी सुरक्षा एजेंसियों या रोसफिनमॉनिटरिंग का अधिकारी बताते थे।
FSB ने कहा, "फर्जी अधिकारी दावा करते थे कि भेजी गई रकम यूक्रेनी सेना के खातों में पहुंच गई है और साझा की गई लोकेशन का इस्तेमाल मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की योजना बनाने के लिए किया गया है।"
एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद युवकों को आपराधिक कार्रवाई की धमकी देकर उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाता था। फिर उन्हें कथित ‘गुप्त अभियानों’ के नाम पर हमलों और आगजनी में शामिल किया जाता था।
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