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जेट इंजन से AI तक: कितना खास है भारत का दिव्यास्त्र मार्क-3 ड्रोन?
जेट इंजन से AI तक: कितना खास है भारत का दिव्यास्त्र मार्क-3 ड्रोन?
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भारत की एक निजी कंपनी ने पूरी तरह भारत में निर्मित कामिकाज़े ड्रोन की पहली उड़ान की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश में स्थित कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड ने सूचित... 17.08.2026, Sputnik भारत
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प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस ड्रोन का इंजन भारतीय प्रोपल्शन कंपनी डीजी प्रोपल्शन ने विकसित किया है और सफल उड़ान ने भारत की एरोस्पेस और रक्षा उत्पादन की क्षमता सिद्ध कर दी है।कंपनी के अनुसार दिव्यास्त्र मार्क-3 परियोजना इसी वर्ष प्रारंभ हुई थी और 11 अगस्त को इस ड्रोन ने अपनी पहली उड़ान पूरी कर ली है। दिव्यास्त्र में आधुनिक स्वायत्त उड़ान नियंत्रण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त लक्ष्य निर्धारण और लंबी दूरी से अचूक वार करने की क्षमता है जिसे भारत में ही विकसित किया गया है।भारत आधुनिक समय के युद्धों में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए अपनी क्षमताओं में वृद्धि कर रहा है। 14 अगस्त को ही भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए 1577 करोड़ रुपए के लॉइटरिंग म्यूनिशन की खरीद का सौदा किया है। भारतीय सेना के तोपखाने ने लॉइटरिंग म्यूनिशन और कामिकाज़े ड्रोन के लिए अलग शक्तिबाण रेजीमेंट्स तैयार करना प्रारंभ किया है। शक्तिबाण रेजीमेंट में उच्च तकनीक वाले ड्रोन की कार्रवाई में निपुण सैनिक होंगे।भारतीय सेना के टैंक रेजिमेंट्स में ड्रोन के युद्ध में पारंगत विशेष शौर्य स्क्वाड्रन तैयार किए जा रहे हैं जिन्हें अत्याधुनिक ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीक से लैस किया जा रहा है।पैदल सेना की हर बटालियन में भी एक अश्नि प्लाटून तैयार की जा रही है जो ड्रोन और ड्रोन रोधी कार्रवाइयों के लिए प्रशिक्षित होगी।
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जेट इंजन से AI तक: कितना खास है भारत का दिव्यास्त्र मार्क-3 ड्रोन?
भारत की एक निजी कंपनी ने पूरी तरह भारत में निर्मित कामिकाज़े ड्रोन की पहली उड़ान की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश में स्थित कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड ने सूचित किया है कि दिव्यास्त्र मार्क-3 नामक अगली पीढ़ी के जेट इंजिन वाले इस ड्रोन का उत्तर प्रदेश की एक चिन्हित ड्रोन परीक्षण हवाई पट्टी से परीक्षण किया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस ड्रोन का इंजन भारतीय प्रोपल्शन कंपनी डीजी प्रोपल्शन ने विकसित किया है और सफल उड़ान ने भारत की एरोस्पेस और रक्षा उत्पादन की क्षमता सिद्ध कर दी है।
कंपनी के अनुसार दिव्यास्त्र मार्क-3 परियोजना इसी वर्ष प्रारंभ हुई थी और 11 अगस्त को इस ड्रोन ने अपनी पहली उड़ान पूरी कर ली है। दिव्यास्त्र में आधुनिक स्वायत्त उड़ान नियंत्रण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त लक्ष्य निर्धारण और लंबी दूरी से अचूक वार करने की क्षमता है जिसे भारत में ही विकसित किया गया है।
भारत आधुनिक समय के युद्धों में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए अपनी क्षमताओं में वृद्धि कर रहा है। 14 अगस्त को ही भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए 1577 करोड़ रुपए के लॉइटरिंग म्यूनिशन की खरीद का सौदा किया है। भारतीय सेना के तोपखाने ने लॉइटरिंग म्यूनिशन और कामिकाज़े ड्रोन के लिए अलग शक्तिबाण रेजीमेंट्स तैयार करना प्रारंभ किया है। शक्तिबाण रेजीमेंट में उच्च तकनीक वाले ड्रोन की कार्रवाई में निपुण सैनिक होंगे।
भारतीय सेना के टैंक रेजिमेंट्स में ड्रोन के युद्ध में पारंगत विशेष शौर्य स्क्वाड्रन तैयार किए जा रहे हैं जिन्हें अत्याधुनिक ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीक से लैस किया जा रहा है।
पैदल सेना की हर बटालियन में भी एक अश्नि प्लाटून तैयार की जा रही है जो ड्रोन और ड्रोन रोधी कार्रवाइयों के लिए प्रशिक्षित होगी।