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भारत में पोत निर्माण और अस्त्र उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी, 5 परियोजनाएं प्रारंभ; जानिए क्या है खासियत

© AP Photo / Saurabh DasA 'kolkata' class destroyer is seen on the left along with other warships during the International Fleet Review in Vishakapatnam, India, Saturday, Feb. 6, 2016.
A 'kolkata' class destroyer is seen on the left along with other warships during the International Fleet Review in Vishakapatnam, India, Saturday, Feb. 6, 2016. - Sputnik भारत, 1920, 24.08.2026
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रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पोत निर्माण कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और धातु ढलाई तथा अस्त्र निर्माण कंपनी यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) की क्षमता में बड़ा विस्तार किया गया है।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कोलकाता में रविवार को दोनों कंपनियों की कुल पांच विस्तार परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
GRSE भारत में पोत बनाने वाला प्रमुख शिपयार्ड है, जबकि YIL की कोलकाता के दमदम में स्थित फैक्टरी लंबे समय से अस्त्र-शस्त्र बनाने वाली प्रमुख संस्था है। GRSE अब तक 800 से ज्यादा युद्धपोत और व्यापारिक पोत बना चुका है। YIL की दमदम फैक्टरी में 1846 से बम, फ्यूज़, गोलियां, छोटे हथियार और उनके हिस्से-पुर्ज़े बनाए जा रहे हैं।
GRSE के विस्तार के लिए हुगली नदी के दोनों किनारों पर दो छोटे शिपयार्ड के अतिरिक्त रायचक में भी 32 एकड़ भूमि पर कार्य किया जाएगा, जिससे वहां युद्धपोतों के निर्माण और मरम्मत के अतिरिक्त मझोले व्यापारिक पोतों का निर्माण भी किया जा सकेगा।
रायचक में 356 मीटर लंबा नदी तट, 96 मीटर की जेटी और 8-10 मीटर की गहराई है। यहां 2,500 करोड़ रुपये की लागत से 200 मीटर लंबा ड्राई डॉक, स्लिपवे और लॉन्चिंग पैड जैसी सुविधाएं बनाई जाएंगी, जहां 200 मीटर लंबे युद्धपोत और 60,000 टन भार वाले व्यापारिक पोत बनाए जा सकेंगे।
इसके अतिरिक्त शालिमार की पुरानी फैक्टरी को 100 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्जीवित किया जाएगा, जहां 130 मीटर का ड्राई डॉक और 120 मीटर का स्लिपवे बनेगा। किदरपोर बंदरगाह में 70 करोड़ रुपये की लागत से 25 मीटर वाटरफ्रंट तैयार किया जाएगा, जहां छोटे पोतों और नौकाओं का निर्माण होगा।
यंत्र इंडिया की इशापोर इस्पात फैक्टरी में 750 करोड़ रुपये की लागत से दो परियोजनाएं प्रारंभ हो रही हैं, जिनसे स्वदेशी धातुविज्ञान और रक्षा उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी।
2,650 टन की पुरानी ढलाई मशीन के स्थान पर 277.59 करोड़ रुपये में 3,000 टन की नई मजबूत हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस लगाई जाएगी, जिससे तोपों की नालें, शस्त्रों के हिस्से और दूसरे भारी रक्षा उत्पाद बनाए जाएंगे।
473.84 करोड़ रुपये में रेडियल फोर्जिंग प्लांट लगाया जाएगा, जिसमें सुपर एलॉय की ढलाई, हवाई बमों के लिए ट्यूब, न्यूक्लियर रिएक्टर के हिस्से और दूसरे अस्त्र बनाए जाएंगे।
इन परियोजनाओं से अत्याधुनिक निर्माण क्षमता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे रक्षा और रेलवे दोनों को लाभ होगा।
An Indian army soldier controls a drone during a mock drill along the Line of Control or LOC between India and Pakistan during a media tour arranged by the Indian army in Jammu and Kashmir's Poonch sector, India, Saturday, Aug.12, 2023. (AP Photo/Channi Anand) - Sputnik भारत, 1920, 07.08.2026
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