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पुतिन और ट्रंप ने फोन पर की बात, विटकॉफ-कुशनर की यात्रा पर हुई चर्चा

© SputnikVladimir Putin
Vladimir Putin - Sputnik भारत, 1920, 08.09.2026
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फोन पर बातचीत की। रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने इसकी जानकारी दी।
उशाकोव ने पत्रकारों से कहा, "फोन पर बातचीत ठीक एक घंटे तक चली। यह रचनात्मक और बेहद स्पष्ट रही।"
उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की मॉस्को और कीव यात्राओं के नतीजों को सकारात्मक बताया। इस दौरान यूक्रेन संघर्ष क्षेत्र के मौजूदा हालात का निष्पक्ष और विस्तृत आकलन भी किया गया।
उशाकोव के मुताबिक, ट्रंप ने यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका मानना है कि इससे रूस और अमेरिका के संबंधों को बहाल करने का रास्ता खुल सकता है।
पुतिन और ट्रंप ने इस दिशा में काम जारी रखने और एक-दूसरे के संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।

विटकॉफ और कुशनर का मॉस्को-कीव दौरा

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने 5 सितंबर को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ करीब तीन घंटे बातचीत की। इसके बाद दोनों अमेरिकी प्रतिनिधि कीव पहुंचे, जहां उन्होंने यूक्रेनी नेता वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की।
विटकॉफ ने कहा, "हमने मॉस्को में काफी प्रगति की है।" उन्होंने यह भी बताया कि रूसी राजधानी में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने "नए विचार" सुने और उम्मीद जताई कि रूस और यूक्रेन के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में नई वार्ता की घोषणा जल्द की जाएगी।
क्रेमलिन के मुताबिक, मॉस्को में हुई बातचीत के दौरान यूक्रेन संकट के समाधान के संभावित रास्तों पर कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। पुतिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने वार्ता को बेहद उपयोगी, स्पष्ट और भरोसेमंद बताया।

यूक्रेन के साथ वार्ता पर रूस का रुख

पुतिन ने पूर्वी आर्थिक मंच के पूर्ण सत्र में कहा था कि रूस और यूक्रेन को सबसे पहले आपस में वार्ता पर सहमत होना चाहिए, जबकि अन्य देश समाधान तलाशने में दोनों पक्षों की सहायता कर सकते हैं। उन्होंने चीन और अमेरिका की मध्यस्थता की भूमिका का भी उल्लेख करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण समाधान की संभावना अब भी बनी हुई है।
वहीं, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था कि मॉस्को केवल संघर्ष को मौजूदा मोर्चे पर रोकने के बजाय उसका दीर्घकालिक समाधान चाहता है। उनके मुताबिक, रूस ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा जिससे संघर्ष केवल अस्थायी रूप से रुक जाए और उसकी सीमाओं के पास सुरक्षा खतरा बना रहे।
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