राजनीति
भारत की सबसे ताज़ा खबरें और वायरल कहानियाँ प्राप्त करें जो राष्ट्रीय घटनाओं और स्थानीय ट्रेंड्स पर आधारित हैं।

BRICS के 20 साल पूरे, 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत तैयार

Narendra Modi - Sputnik भारत, 1920, 11.09.2026
सब्सक्राइब करें
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसमें समूह के 11 सदस्य देशों के नेताओं के साथ साझेदार देशों और विशेष रूप से आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में BRICS के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को ठोस सहयोग और वैश्विक भूमिका में बदलने पर जोर रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत मंडपम में दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। व्यापार, वित्त, सीमा पार भुगतान, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियां और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताएं इसके प्रमुख एजेंडे में शामिल रहने की उम्मीद है।
यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब BRICS सहयोग के 20 साल पूरे कर रहा है और विस्तार के बाद समूह एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है।
BRICS में अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। वहीं बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इसके 10 साझेदार देश हैं।
BRICS के सदस्य देशों की विश्व की आबादी में करीब 49 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 40 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ये आंकड़े व्यापार, ऊर्जा, वित्त और अंतरराष्ट्रीय मामलों में समूह के बढ़ते प्रभाव को दिखाते हैं।

भारत की BRICS प्राथमिकताएं

BRICS की भारत की चौथी अध्यक्षता का विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है। इसमें जन-केंद्रित ‘मानवता प्रथम’ दृष्टिकोण अपनाया गया है।
नई दिल्ली इन क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने पर जोर दे रही है:
व्यापार, निवेश और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं
राष्ट्रीय मुद्राओं में लेनदेन और सीमा पार भुगतान
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए वित्तपोषण और डिजिटल व्यापार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियां
ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा
न्यू डेवलपमेंट बैंक के माध्यम से विकास के लिए वित्तपोषण
वैश्विक संस्थानों में ग्लोबल साउथ का अधिक प्रतिनिधित्व
भारत BRICS अर्थव्यवस्थाओं के बीच वित्तीय संपर्क मजबूत करने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से जुड़े अपने अनुभव का उपयोग करना चाहता है।

पुतिन-मोदी वार्ता से बढ़ेगा रणनीतिक महत्व

BRICS सम्मेलन से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे।
वार्ता में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और भुगतान तंत्र प्रमुखता से शामिल रहने की उम्मीद है।
भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग है। रूस से भारत के ऊर्जा आयात में बढ़ोतरी के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार करीब 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए भारत और रूस भुगतान तंत्र, लॉजिस्टिक्स और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं।

शी जिनपिंग की भागीदारी से जुड़ा एक और अहम पहलू

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भागीदारी सम्मेलन में एक और महत्वपूर्ण रणनीतिक पहलू जोड़ेगी।
अगर शी भारत आते हैं, तो 2019 में मामल्लपुरम में हुए अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। यह यात्रा ऐसे समय हो सकती है, जब नई दिल्ली और बीजिंग अपने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
BRICS भारत को चीन, रूस और अन्य प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संवाद का मंच देता है। इसके साथ ही विकास, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और वित्त जैसे उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी मिलता है, जहां व्यापक सहमति संभव है।

ग्लोबल साउथ के लिए बड़ी आवाज

भारत संयुक्त राष्ट्र में अधिक प्रतिनिधित्व और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार समेत वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की मजबूत आवाज चाहता है।
2015 में 100 अरब डॉलर की अधिकृत पूंजी के साथ स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए BRICS का एक प्रमुख तंत्र है।
नई दिल्ली के लिए ऐसे संस्थानों को मजबूत करना विकास के लिए वित्तपोषण बढ़ाने, वैश्विक शासन को अधिक समावेशी बनाने और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को आगे ले जाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
BRICS के दो दशक पूरे होने के बीच दिल्ली सम्मेलन यह तय करने की दिशा में अहम होगा कि विस्तारित समूह अपने आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रभाव को व्यावहारिक सहयोग में बदलकर उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा पाता है या नहीं।
न्यूज़ फ़ीड
0
loader
चैट्स
Заголовок открываемого материала