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इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट सिर्फ एक 'दिखावटी संस्था', न्याय से इसका कोई वास्ता नहीं: रूसी विदेश मंत्री
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट सिर्फ एक 'दिखावटी संस्था', न्याय से इसका कोई वास्ता नहीं: रूसी विदेश मंत्री
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रूसी विदेश मंत्री सर्गे लावरोव ने मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर तीखा हमला बोलते हुए इसे एक 'अर्ध-न्यायिक' (दिखावटी) संस्था करार दिया।... 15.09.2026, Sputnik भारत
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लावरोव ने रेखांकित किया कि खुद अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश हेग स्थित इस अदालत की गतिविधियों का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोर्ट अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अपने ही स्थापित नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए विशुद्ध रूप से राजनीतिक आकाओं के आदेशों का पालन कर रहा है।रूसी विदेश मंत्री के अनुसार, न तो आईसीसी का कोई विकल्प खोजने की ज़रूरत है और न ही इस संस्था की कोई उपयोगिता बची है, क्योंकि संघर्षों को सुलझाने में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक ट्रिब्यूनल इतिहास में शायद ही कभी सफल रहे हैं।कूटनीतिक पक्षपात का उदाहरण देते हुए लावरोव ने आगे कहा, "यूक्रेन मामले में आईसीसी का अभियोजक कार्यालय इस बात को कतई नहीं छिपाता कि उनकी जांच की सुई सिर्फ और सिर्फ रूस की तरफ है। हद तो यह है कि जब यूक्रेन ने 2024 में 'रोम संविधि' को मंज़ूरी दी, तो उसने एक अजीबोगरीब शर्त रखी थी। इसके तहत यूक्रेनी नागरिकों द्वारा किए गए युद्ध अपराधों को अगले आठ वर्षों के लिए आईसीसी के दायरे से बाहर रख दिया गया, और इस पर न तो अदालत ने और न ही इसके सदस्य देशों ने कोई आपत्ति जताई।"गौरतलब है कि पिछले ही सप्ताह रूसी सुरक्षा परिषद के उप-अध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने भी आईसीसी को न्याय का एक 'विफल मॉडल' बताते हुए कहा था कि यह संस्था जल्द ही पूरी तरह प्रासंगिकता खो देगी।
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रूस , रूसी विदेश मंत्रालय , यूक्रेन , अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (icc)
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इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट सिर्फ एक 'दिखावटी संस्था', न्याय से इसका कोई वास्ता नहीं: रूसी विदेश मंत्री
रूसी विदेश मंत्री सर्गे लावरोव ने मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर तीखा हमला बोलते हुए इसे एक 'अर्ध-न्यायिक' (दिखावटी) संस्था करार दिया। उन्होंने कहा कि इस अदालत का वास्तविक न्याय से कोई लेना-देना नहीं है।
यूक्रेन संकट पर आयोजित राजनयिकों की एक गोलमेज बैठक में लावरोव ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय एक ऐसी संस्था है जिसकी विस्तृत आलोचना में समय गंवाने की भी आवश्यकता नहीं है। हर कोई भली-भांति जानता है कि यह महज़ एक अर्ध-न्यायिक ढांचा है, जिसका न्याय से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है और यह पूरी तरह से अपने पश्चिमी आकाओं के इशारों पर काम कर रहा है।"
लावरोव ने रेखांकित किया कि खुद अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश हेग स्थित इस अदालत की गतिविधियों का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोर्ट अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अपने ही स्थापित नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए विशुद्ध रूप से राजनीतिक आकाओं के आदेशों का पालन कर रहा है।
रूसी विदेश मंत्री के अनुसार, न तो आईसीसी का कोई विकल्प खोजने की ज़रूरत है और न ही इस संस्था की कोई उपयोगिता बची है, क्योंकि संघर्षों को सुलझाने में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक ट्रिब्यूनल इतिहास में शायद ही कभी सफल रहे हैं।
कूटनीतिक पक्षपात का उदाहरण देते हुए लावरोव ने आगे कहा, "यूक्रेन मामले में आईसीसी का अभियोजक कार्यालय इस बात को कतई नहीं छिपाता कि उनकी जांच की सुई सिर्फ और सिर्फ रूस की तरफ है। हद तो यह है कि जब यूक्रेन ने 2024 में 'रोम संविधि' को मंज़ूरी दी, तो उसने एक अजीबोगरीब शर्त रखी थी। इसके तहत यूक्रेनी नागरिकों द्वारा किए गए युद्ध अपराधों को अगले आठ वर्षों के लिए आईसीसी के दायरे से बाहर रख दिया गया, और इस पर न तो अदालत ने और न ही इसके सदस्य देशों ने कोई आपत्ति जताई।"
गौरतलब है कि पिछले ही सप्ताह रूसी सुरक्षा परिषद के उप-अध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने भी आईसीसी को न्याय का एक 'विफल मॉडल' बताते हुए कहा था कि यह संस्था जल्द ही पूरी तरह प्रासंगिकता खो देगी।