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राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ऊर्जा संसाधनों की कीमत में हेरफेर नहीं किया जाना चाहिए: जयशंकर
राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ऊर्जा संसाधनों की कीमत में हेरफेर नहीं किया जाना चाहिए: जयशंकर
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भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक चुनौतियों और बहुपक्षीय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव से निपटने के लिए 'ग्लोबल साउथ' देशों के बीच ज़्यादा सहयोग का आह्वान किया है।
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विदेश मंत्री न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित ग्लोबल साउथ के देशों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक स्थिति में बढ़ते संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखलाओं और व्यापार पर दबाव, निवेश प्रवाह में बिखराव, बढ़ते ऋण संकट और अपर्याप्त विकास वित्त जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।विदेश मंत्री ने ऊर्जा की उपलब्धता, अनाज और उर्वरक आपूर्ति से संबंधित चुनौतियों का समाधान करके खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और निष्पक्ष आर्थिक एवं व्यापारिक प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों का आह्वान किया। इसके अलावा उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के कुशल प्रबंधन पर जोर दिया ताकि विभाजन को रोका जा सके और ग्लोबल साउथ के देशों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर निर्णय लेने वाली संरचनाओं में अधिक समावेश का आह्वान किया।
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राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ऊर्जा संसाधनों की कीमत में हेरफेर नहीं किया जाना चाहिए: जयशंकर
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक चुनौतियों और बहुपक्षीय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ देशों के बीच ज़्यादा सहयोग का आह्वान किया है।
विदेश मंत्री न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित ग्लोबल साउथ के देशों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक स्थिति में बढ़ते संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखलाओं और व्यापार पर दबाव, निवेश प्रवाह में बिखराव, बढ़ते ऋण संकट और अपर्याप्त विकास वित्त जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को आपूर्ति श्रृंखला, वित्त और संपर्क संबंधी बाधाओं सहित प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
विदेश मंत्री ने
ऊर्जा की उपलब्धता, अनाज और उर्वरक आपूर्ति से संबंधित चुनौतियों का समाधान करके खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और निष्पक्ष आर्थिक एवं व्यापारिक प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों का आह्वान किया।
जयशंकर ने समुद्री संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नाविकों तथा वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इसके अलावा उन्होंने
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के कुशल प्रबंधन पर जोर दिया ताकि विभाजन को रोका जा सके और ग्लोबल साउथ के देशों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर निर्णय लेने वाली संरचनाओं में अधिक समावेश का आह्वान किया।