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हथियारों की संख्या नहीं, फैसले की रफ्तार तय करेगी भविष्य की सैन्य शक्ति: राजनाथ सिंह
हथियारों की संख्या नहीं, फैसले की रफ्तार तय करेगी भविष्य की सैन्य शक्ति: राजनाथ सिंह
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भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सैन्य शक्ति का निर्धारण केवल उपलब्ध सैन्य प्लेटफॉर्म की संख्या से नहीं, बल्कि खतरों को पहचानने, समझने... 10.10.2026, Sputnik भारत
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जोधपुर में बहुराष्ट्रीय वायु सैन्य अभ्यास 'तरंग शक्ति' के दूसरे संस्करण के समापन समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से जटिल हो रहा है। अब युद्ध केवल जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर क्षेत्र, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और सूचना क्षेत्र तक फैल चुका है।उन्होंने कहा कि ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों ने सैन्य अभियानों की गति, पैमाने और प्रकृति को बदल दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता फैसले लेने में मदद कर रही है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, लंबी दूरी के सटीक हथियार और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का सैन्य इस्तेमाल नए सुरक्षा जोखिम पैदा कर रहा है।लंबे युद्ध के लिए स्वदेशी हथियार जरूरीसिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि संकट के समय कोई भी देश लंबे युद्ध को तब तक जारी नहीं रख सकता, जब तक वह अपने हथियार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां खुद बनाने में सक्षम न हो।उन्होंने कहा कि इसी वास्तविकता को समझते हुए भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय नीति बनाया। भारतीय सशस्त्र बल अब संरचनात्मक, तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर व्यापक बदलाव से गुजर रहे हैं।पांचवीं पीढ़ी की तकनीक पर भारत की नजररक्षा मंत्री ने कहा कि स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, ध्रुव, रुद्र और प्रचंड हेलीकॉप्टर, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, रडार और मानवरहित प्रणालियां भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता को दिखाती हैं।उन्होंने कहा कि भारत का उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) कार्यक्रम देश के लिए पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ लड़ाकू विमान तकनीक में महारत हासिल करने का रास्ता तैयार करेगा। इसके साथ ही भारत उन्नत एयरो इंजन के विकास और सह-उत्पादन पर भी जोर दे रहा है।उन्होंने भविष्य के रक्षा संबंधों में प्रौद्योगिकी और भरोसे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ अनुसंधान, सह-विकास, सह-उत्पादन, रखरखाव और प्रशिक्षण के नए अवसर तलाशने के लिए तैयार है।
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भारत, राजनाथ सिंह
हथियारों की संख्या नहीं, फैसले की रफ्तार तय करेगी भविष्य की सैन्य शक्ति: राजनाथ सिंह
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सैन्य शक्ति का निर्धारण केवल उपलब्ध सैन्य प्लेटफॉर्म की संख्या से नहीं, बल्कि खतरों को पहचानने, समझने, फैसला लेने और कार्रवाई करने की रफ्तार से होगा।
जोधपुर में बहुराष्ट्रीय वायु सैन्य अभ्यास 'तरंग शक्ति' के दूसरे संस्करण के समापन समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से जटिल हो रहा है। अब युद्ध केवल जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर क्षेत्र, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और सूचना क्षेत्र तक फैल चुका है।
रक्षा मंत्री ने कहा, "भविष्य की सैन्य शक्ति हमारे पास मौजूद प्लेटफॉर्म की संख्या से कम और खतरों को पहचानने, समझने, फैसला लेने तथा कार्रवाई करने की गति से अधिक तय होगी।"
उन्होंने कहा कि ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों ने सैन्य अभियानों की गति, पैमाने और प्रकृति को बदल दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता फैसले लेने में मदद कर रही है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, लंबी दूरी के सटीक हथियार और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का सैन्य इस्तेमाल नए सुरक्षा जोखिम पैदा कर रहा है।
लंबे युद्ध के लिए स्वदेशी हथियार जरूरी
सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि संकट के समय कोई भी देश लंबे युद्ध को तब तक जारी नहीं रख सकता, जब तक वह अपने हथियार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां खुद बनाने में सक्षम न हो।
उन्होंने कहा कि इसी वास्तविकता को समझते हुए भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय नीति बनाया। भारतीय सशस्त्र बल अब संरचनात्मक, तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर व्यापक बदलाव से गुजर रहे हैं।
पांचवीं पीढ़ी की तकनीक पर भारत की नजर
रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, ध्रुव, रुद्र और प्रचंड हेलीकॉप्टर, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, रडार और मानवरहित प्रणालियां भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता को दिखाती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) कार्यक्रम देश के लिए पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ लड़ाकू विमान तकनीक में महारत हासिल करने का रास्ता तैयार करेगा। इसके साथ ही भारत उन्नत एयरो इंजन के विकास और सह-उत्पादन पर भी जोर दे रहा है।
सिंह ने कहा, "हमारी महत्वाकांक्षा केवल सैन्य उपकरण बनाने तक सीमित नहीं है। हमारा लक्ष्य डिजाइन करना, नवाचार करना, विभिन्न प्रणालियों को एकीकृत करना और उन्हें तैयार करके उपलब्ध कराना है।"
उन्होंने भविष्य के रक्षा संबंधों में प्रौद्योगिकी और भरोसे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ अनुसंधान, सह-विकास, सह-उत्पादन, रखरखाव और प्रशिक्षण के नए अवसर तलाशने के लिए तैयार है।